
आसनसोल : शनिवार शाम नूनिया नदी में डूबे आराडंगाल निवासी उपेंद्र राय (55 वर्ष) का शव सोमवार सुबह निमचा क्षेत्र के पास बरामद कर लिया गया। दो दिनों तक चली लगातार तलाशी के बाद शव मिलने से जहां परिजन के बीच शोक की लहर दौड़ गई, वहीं इलाके में भी माहौल ग़मगीन हो गया।घटना की जानकारी मिलते ही दक्षिण थाना पुलिस, आपदा प्रबंधन दल और स्थानीय लोगों की मदद से खोज अभियान शुरू किया गया था। रेस्क्यू टीम ने बोट, रस्सी और अन्य संसाधनों की मदद से लगातार नदी में खोजबीन की। अंततः सोमवार सुबह शव निमचा के निकट पानी में तैरता हुआ मिला, जिसे पुलिस ने तुरंत अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए आसनसोल जिला अस्पताल भेज दिया।

मां घाघर बुड़ी मंदिर के पास हुआ हादसा
स्थानीय लोगों के अनुसार, उपेंद्र राय शनिवार शाम मां घाघर बुड़ी मंदिर के पास नदी किनारे गए थे। इसी दौरान उनका पैर फिसल गया और वे संतुलन खोकर पानी में गिर पड़े। वहां मौजूद लोगों ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन तेज़ बहाव और पानी की गहराई के कारण उन्हें बचाया नहीं जा सका।घटना के बाद से ही उपेंद्र राय का परिवार सदमे में है। उनके परिजन बार-बार यही सवाल पूछते रहे कि अगर तत्काल मदद या कोई सुरक्षा उपाय होता, तो शायद उपेंद्र को बचाया जा सकता था।
प्रशासन की सतर्कता और सहयोग से मिला शव
अधिकारियों ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही राहत दल सक्रिय हुआ और दो दिन तक चौकसी से तलाशी अभियान चलाया गया। प्रशासन ने इस प्रयास में स्थानीय नाविकों और गोताखोरों की भी मदद ली। अंततः सोमवार को सफलता मिली और शव बरामद किया गया।दक्षिण थाना पुलिस ने इस संबंध में एक अप्राकृतिक मृत्यु का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है, ताकि आगे की कार्रवाई की जा सके।

नदी किनारे सुरक्षा उपायों की उठी मांग
उपेंद्र राय की मौत के बाद आराडंगाल और निमचा क्षेत्र के लोगों में आक्रोश और दुःख दोनों का माहौल है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि नूनिया नदी के किनारे सुरक्षा बैरिकेड, चेतावनी बोर्ड और स्थायी गार्ड व्यवस्था की जाए।स्थानीय निवासी बताते हैं कि यह पहली घटना नहीं है—नदी किनारे सुरक्षा उपायों के अभाव में पूर्व में भी हादसे हो चुके हैं।एक स्थानीय बुजुर्ग ने कहा, “जब तक प्रशासनिक चेतावनी और सुरक्षा प्रबंध नहीं होते, तब तक ऐसे हादसे दोहराए जाते रहेंगे। उपेंद्र बाबू की मौत किसी एक परिवार की नहीं, पूरे समाज की क्षति है।”














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