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आसनसोल में हूल दिवस पर भाजपा की रैली, आदिवासी अधिकारों की गूंज

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आसनसोल :  हूल विद्रोह दिवस के अवसर पर सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एसटी/एससी मोर्चा की ओर से गिरजामोड़ से कॉरपोरेशन मोड़ तक एक भव्य रैली का आयोजन किया गया। परंपरागत तीर-धनुष, ढोल-नगाड़ों और आदिवासी वेशभूषा में सजे कार्यकर्ताओं की यह रैली न केवल सांस्कृतिक पहचान की झलक थी, बल्कि आदिवासी समाज के अधिकारों की मुखर अभिव्यक्ति भी बन गई।

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रैली के समापन पर आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए आदिवासी नेता सुशील टुडू ने कहा, “हूल दिवस कोई उत्सव नहीं, यह आदिवासी समाज की अस्मिता, संघर्ष और बलिदान का प्रतीक है। वाम सरकारों ने इसे कमजोर किया और वर्तमान सरकार इसे केवल सांस्कृतिक उत्सव तक सीमित कर रही है। अब समय है कि आदिवासी समाज अपने अधिकारों की लड़ाई खुद लड़े।” सभा में भाजपा के पश्चिम बर्दवान जिला अध्यक्ष देबतनु भट्टाचार्य ने राज्य सरकार पर आदिवासी समाज के साथ छल और उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा, “तृणमूल सरकार की योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित हैं। जमीनी स्तर पर पंचायतों में भ्रष्टाचार और योजनाओं से वंचित आदिवासी आम बात हो गई है। भाजपा आने वाले समय में आदिवासियों के आत्मसम्मान और अधिकारों के लिए राज्यव्यापी आंदोलन करेगी।”

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सभा में प्रमुख रूप से वन अधिकार अधिनियम का क्रियान्वयन, आदिवासी छात्रों के लिए छात्रवृत्ति एवं छात्रावास, जल-जंगल-जमीन पर वैधानिक अधिकार, और सरकारी नौकरियों में आरक्षण की ईमानदार व्यवस्था जैसी मांगें उठाईं गईं। महिलाओं और युवाओं की भारी भागीदारी, सिद्धू-कान्हू और बिरसा मुंडा के नारे, क्रांतिकारी गीतों और आदिवासी नृत्य ने इस कार्यक्रम को एक आंदोलनात्मक सांस्कृतिक मंच में तब्दील कर दिया। हूल दिवस पर यह आयोजन आदिवासी चेतना और राजनीतिक सक्रियता का नया स्वरूप लेकर सामने आया।

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