
दुर्गापुर : राजनीति में अपने बेबाक बयानों और अलग अंदाज़ के लिए पहचाने जाने वाले भाजपा के वरिष्ठ नेता दिलीप घोष एक बार फिर सुर्खियों में हैं। सुबह दुर्गापुर के चंडीदास बाजार में मॉर्निंग वॉक पर निकले घोष इस बार हाथ में डुगडुगी लेकर कुर्सी पर बैठे दिखाई दिए। उन्होंने राहगीरों और दुकानदारों के साथ ‘चाय पर चर्चा’ की और बंगाल की राजनीति पर तीखे मगर चुटीले अंदाज़ में तंज कसे।पत्रकारों ने जब उनसे पूछा कि यह डुगडुगी किसे जगाने के लिए बजाई जा रही है, तो दिलीप घोष ने अपने चिर-परिचित अंदाज़ में मुस्कुराते हुए कहा,”जिसका बजेगा, वही समझेगा!”उनके इस जवाब पर वहां मौजूद लोगों के बीच हंसी और कौतुहल का माहौल बन गया। लोगों ने उनके साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं और इस तरह उनका यह मॉर्निंग वॉक चर्चा का विषय बन गया।इस मौके पर घोष ने अपने पुराने अंदाज़ को दोहराते हुए राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा,”राज्य की राजनीति में कुछ लोग सोए हैं, उन्हें जगाने के लिए यह डुगडुगी है। जनता सब देख रही है, और 2026 में जवाब देगी।”

भट्टाचार्य के समर्थन में दिलीप घोष
राज्य भाजपा अध्यक्ष पद को लेकर चल रही अटकलों के बीच जब उनसे श्रमिक भट्टाचार्य के नाम पर प्रतिक्रिया मांगी गई तो उन्होंने कहा,
“श्रमिक भट्टाचार्य अनुभवी, जमीनी और पार्टी के प्रति समर्पित नेता हैं। जो भी जिम्मेदारी उन्हें मिलेगी, वह पूरी निष्ठा से निभाएंगे।”जब उनसे यह पूछा गया कि क्या वे स्वयं भी अध्यक्ष पद की दौड़ में हैं, तो उन्होंने ठहाका लगाते हुए जवाब दिया,”मैं तो हर सुबह दौड़ता हूं, लेकिन पद के लिए नहीं, स्वास्थ्य के लिए!”

भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह
दिलीप घोष के इस अंदाज़ ने न सिर्फ स्थानीय लोगों को हंसाया, बल्कि भाजपा कार्यकर्ताओं में भी उत्साह भर दिया। एक स्थानीय कार्यकर्ता ने कहा,”दिलीप दा का अंदाज़ ही अलग है। वह जब भी आते हैं, जनता के बीच नई ऊर्जा भर देते हैं।”

राजनीति में संदेश का नया तरीका
दिलीप घोष का यह अनोखा तरीका न सिर्फ राजनीतिक संदेश देने का माध्यम बन गया, बल्कि यह भी दर्शाता है कि वह अपने संपर्क और संवाद शैली में आम जनता के कितने करीब हैं।कुल मिलाकर, दिलीप घोष की यह डुगडुगी वाली चाय चर्चा पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया रंग और नई हलचल लेकर आई है, जिसकी गूंज दूर तक सुनाई दे रही है।














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