
आसनसोल : केंद्र सरकार की श्रम संहिता के विरोध में वामपंथी पार्टियों, कांग्रेस और केंद्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा बुधवार, 9 जुलाई को बुलाए गए अखिल भारतीय हड़ताल को लेकर आसनसोल और सालानपुर क्षेत्रों में माहौल गर्माता जा रहा है। एक ओर जहां सीपीएम, सीआईटीयू, डीवाईएफआई, महिला समिति, अखिल भारतीय किसान सभा जैसी वाम समर्थित इकाइयों ने पूरे जोरशोर से हड़ताल का समर्थन किया है, वहीं दूसरी ओर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस से जुड़ा श्रमिक संगठन आईएनटीटीयूसी इस हड़ताल का विरोध कर रहा है।
वाम संगठनों ने निकाला बाइक जुलूस, किया जनजागरण
हड़ताल को सफल बनाने के लिए वामपंथी संगठनों ने सोमवार को सालानपुर के रूपनारायणपुर, जेमारी, देंदुआ, अल्लादी जैसे इलाकों में बाइक जुलूस निकाला। जेमारी में मेघनाथ बनर्जी और अबीर घोष ने जनसभाओं को संबोधित करते हुए केंद्र की श्रम नीतियों को मजदूर विरोधी बताया और कहा कि यह हड़ताल श्रमिक अधिकारों की रक्षा के लिए अनिवार्य है।
आईएनटीटीयूसी का विरोध, सड़क पर उतरने की चेतावनी
वहीं, सालानपुर ब्लॉक आईएनटीटीयूसी के अध्यक्ष मनोज तिवारी ने स्पष्ट किया कि ब्लॉक के लगभग 40 उद्योगों के छह हजार मजदूर हड़ताल में शामिल नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि “हमें ऊपर से आदेश मिला है कि यदि हड़ताल समर्थक सड़कों पर उतरे तो हम भी विरोध में उतरेंगे।” तृणमूल उपाध्यक्ष भोला सिंह ने भी इसी बात को दोहराते हुए कहा कि इस बंद का सालानपुर में कोई असर नहीं होगा।

बैंक और एटीएम सेवा रहेगी बाधित, बसों को लेकर असमंजस
हालांकि राज्य सरकार ने श्रम संहिता को लागू नहीं करने का आश्वासन दिया है, फिर भी बैंकों की यूनियनों ने पहले ही हड़ताल को समर्थन दे दिया है। इस कारण कल कई बैंकों के बंद रहने और एटीएम सेवाओं के प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है।
बस सेवाओं को लेकर स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं है। भोला सिंह ने जानकारी दी कि चित्तरंजन से खुलने वाली बसों को चलाने के निर्देश दिए गए हैं, परंतु आसनसोल से आने वाली बसों के संचालन पर अब भी संशय बना हुआ है।

कोयला खदानों और अन्य उद्योगों की स्थिति आज स्पष्ट नहीं
हड़ताल का कोयला खदानों और अन्य प्रमुख उद्योगों पर क्या असर होगा, इस बारे में स्थिति फिलहाल अस्पष्ट है। हालांकि, वामपंथी संगठनों का दावा है कि मजदूरों में भारी असंतोष है और हड़ताल व्यापक असर डालेगी। 9 जुलाई को श्रमिक संगठनों द्वारा बुलाए गए बंद के समर्थन और विरोध में खिंची रेखाएं अब स्पष्ट हो चुकी हैं। एक ओर हड़ताल के पक्ष में जनजागरण और समर्थन की लहर है, तो दूसरी ओर सत्ता पक्ष से जुड़ी ट्रेड यूनियनें इसके खिलाफ खुलकर सामने आ चुकी हैं। अब देखना यह होगा कि कल का दिन आसनसोल और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में किस रूप में उभरता है — शांत विरोध के रूप में या टकराव की स्थिति के साथ।














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