
रानीगंज : बुधवार को वामपंथी ट्रेड यूनियनों द्वारा आहूत भारत बंद का असर रानीगंज के खनन क्षेत्रों में स्पष्ट रूप से दिखाई दिया, जबकि औद्योगिक इलाकों में तृणमूल कांग्रेस और पुलिस की सक्रियता के कारण बंद आंशिक रूप से विफल रहा। सुबह से ही बारिश के बीच सीटू और वामपंथी संगठनों के कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे और वाहनों की आवाजाही रोककर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।रानीगंज शहर के मुख्य इलाकों—बाजार और शिशु बागान में जबरदस्त अवरोध लगाया गया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार की श्रम विरोधी नीतियों, निजीकरण और बढ़ती महंगाई के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। लेकिन जैसे ही बारिश थोड़ी थमी, पुलिस ने अवरोध हटाने की कार्रवाई शुरू की, जिससे वामपंथी कार्यकर्ताओं के साथ धक्का-मुक्की और हल्की झड़प की स्थिति बन गई।

स्थिति को बिगड़ता देख पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए मार्ग को खाली कराया और यातायात बहाल करने का प्रयास किया। इस दौरान कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी भी हुई, जिससे वामपंथी कार्यकर्ताओं में आक्रोश फैल गया।एक प्रदर्शनकारी नेता ने कहा,“यह बंद देश के मेहनतकश वर्ग के अधिकारों की लड़ाई है। तृणमूल कांग्रेस केंद्र सरकार के खिलाफ बुलाए गए इस आंदोलन का विरोध कर रही है और हमारे शांतिपूर्ण प्रदर्शन को रोकने के लिए पुलिस का दुरुपयोग किया जा रहा है।”रानीगंज के कोलियरी इलाकों में बंद पूरी तरह सफल रहा। अधिकांश खदानों में काम ठप रहा और कर्मचारी आंदोलनकारियों के साथ खड़े दिखे।

दूसरी ओर, रानीगंज औद्योगिक तालुका में तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने पुलिस प्रशासन की मदद से दुकानें खुलवाईं और वाहनों की आवाजाही सामान्य बनाए रखने का प्रयास किया।इस दौरान कई जगहों पर तनावपूर्ण स्थिति बनी रही, विशेषकर शिशु बागान और बस्तीपाड़ा इलाके में जहां वामपंथी और तृणमूल समर्थकों के बीच नारेबाजी और तीखी बहस देखने को मिली। हालांकि, स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई, जिससे कोई गंभीर घटना नहीं घटी।यह बंद रानीगंज में राजनीतिक ध्रुवीकरण और जनता की समस्याओं के प्रति जागरूकता का प्रतीक बन गया है। वामपंथी संगठन जहां श्रमिकों के अधिकारों की लड़ाई का दावा कर रहे हैं, वहीं सत्ताधारी पार्टी इसे आम जनता के खिलाफ अवरोध के रूप में देख रही है।आगामी दिनों में यह संघर्ष और तीव्र होने की संभावना जताई जा रही है, विशेषकर जब पंचायत और निकाय चुनाव निकट हों। ऐसे में रानीगंज एक बार फिर राजनीतिक संघर्ष का केंद्र बनता दिखाई दे रहा है।














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