
आसनसोल : बुधवार को देशभर में केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर आयोजित अखिल भारतीय हड़ताल का प्रभाव चित्तरंजन रेल इंजन कारखाना (सीएलडब्ल्यू) में भी देखने को मिला, हालांकि यह प्रभाव अपने अलग रूप में सामने आया। मज़दूरों ने कार्य में भाग लेते हुए भी हड़ताल का समर्थन किया।

सुबह होते ही सीआरएमसी/एनएफआईआर/इंटक समर्थक कर्मचारी कारखाने के विभिन्न द्वारों पर काले बैज पहनकर एकत्र हुए और मौन विरोध जताया। उन्होंने अपनी मांगों से संबंधित तख्तियां और पोस्टर लगाए, जिन पर पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली, सरकारी उपक्रमों के निजीकरण पर रोक, तथा चित्तरंजन रेल इंजन कारखाना में 648 पदों को समाप्त न करने की बातें प्रमुखता से दर्ज थीं।

मज़दूर नेता इंद्रजीत सिंह ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि वे हड़ताल के उद्देश्यों से सहमत हैं और इन्हें पूरी तरह समर्थन देते हैं। उन्होंने कहा, “हम अपने अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन चूंकि पहले से तय किया गया था कि हम संगठित रूप से काम बंद नहीं करेंगे, इसलिए हम ड्यूटी पर तो हैं, पर विरोध भी दर्ज कर रहे हैं।”इंद्रजीत बाबू ने जोर देकर कहा कि केंद्रीय कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना का बहाल किया जाना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यह उनकी वृद्धावस्था की सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन के लिए अनिवार्य है। उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि यदि सार्वजनिक उपक्रमों का निजीकरण इसी प्रकार जारी रहा तो लाखों कर्मचारियों की नौकरियां खतरे में पड़ जाएंगी।कारखाने के अंदर अनुशासन और कामकाज सामान्य रूप से चलता रहा, लेकिन कर्मचारियों की बाजुओं पर लगे काले बैज यह संकेत देते रहे कि वे सरकार की नीतियों से नाराज़ हैं।

यह विरोध एक संतुलित और संगठित तरीके से अभिव्यक्त किया गया, जिससे उत्पादन भी बाधित नहीं हुआ और हड़ताल के मुद्दे भी सामने लाए गए।मज़दूर संगठनों का मानना है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर शीघ्र ध्यान नहीं दिया, तो आने वाले दिनों में विरोध और तेज़ किया जा सकता है।चित्तरंजन रेल कारखाने में हुए इस प्रतीकात्मक विरोध ने यह साबित कर दिया कि मज़दूर वर्ग अब भी अपने अधिकारों को लेकर जागरूक है और हर मंच से अपनी बात कहने का साहस रखता है—चाहे वह बैज के जरिए ही क्यों न हो।














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