
आसनसोल : बुधवार, 9 जुलाई को देशभर की 10 ट्रेड यूनियनों द्वारा आहूत भारत बंद का असर आसनसोल शिल्पांचल में भी व्यापक रूप से देखा गया। सुबह से ही वामपंथी संगठनों के कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए और विभिन्न इलाकों में जुलूस, नारेबाजी, दुकानें बंद कराने और सड़क जाम की गतिविधियों में जुट गए।बंद का सबसे अधिक प्रभाव बीएनआर मोड़ पर देखा गया, जहां चारों दिशाओं से यातायात पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया गया। इस वजह से स्कूली बच्चों की बसें, कार्यालय जाने वाले कर्मचारी और यहां तक कि एम्बुलेंस तक प्रभावित हुई।

आम लोग जाम के बीच फंसे रहे। एक स्थानीय व्यक्ति ने कहा, “सुबह ऑफिस निकलने के बाद काफी देर तक फंसे रहे, अंततः पैदल ही लौटना पड़ा।”वामपंथी नेताओं ने इस बंद को केवल राजनीतिक आंदोलन न बताते हुए इसे अधिकारों की लड़ाई करार दिया। उन्होंने कहा कि बंद का उद्देश्य है—मनरेगा के तहत 100 दिन के कार्यों में पारदर्शिता,श्रमिकों का शोषण बंद हो,शिक्षा और स्वास्थ्य में भ्रष्टाचार पर रोक लगे,केंद्र और राज्य सरकार की जनविरोधी नीतियों का विरोध किया जाए ।

प्रशासन की ओर से पर्याप्त संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई थी, लेकिन सुबह के समय आंदोलन की तीव्रता के कारण कुछ समय के लिए जनजीवन अस्त-व्यस्त रहा। कुछ जगहों पर बंद समर्थकों और दुकानदारों के बीच बहस और हल्की झड़पें भी देखी गईं। यह भारत बंद आसनसोल की सड़कों पर केवल सियासी विरोध नहीं, बल्कि जनमानस की पीड़ा और आक्रोश की आवाज़ बनकर उभरा। शिल्पांचल में श्रमिकों और आम नागरिकों की सहभागिता ने स्पष्ट कर दिया कि वे अब अपने अधिकारों और समस्याओं को लेकर अधिक सजग और मुखर हो चुके हैं।














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