
आसनसोल : आसनसोल के एक प्रतिष्ठित निजी अस्पताल हेल्थवर्ल्ड हॉस्पिटल में गर्भवती महिला के साथ हुई बदसलूकी, धक्का-मुक्की और मारपीट का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। धनबाद निवासी 30 वर्षीय ब्यूटी कुमारी अपने पति सूरज कुमार के साथ अल्ट्रासाउंड कराने आई थीं, लेकिन अस्पताल प्रशासन की लापरवाही और असंवेदनशील रवैये के कारण उन्हें मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न झेलना पड़ा।
पीड़ित सूरज कुमार ने बताया कि वह गुड़गांव स्थित एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं। उनकी पत्नी दो महीने की गर्भवती हैं। ससुराल (सृष्टिनगर, आसनसोल) की सलाह पर उन्होंने मंगलवार को अस्पताल की हेल्पलाइन से संपर्क कर बुधवार सुबह 9 से 9:30 बजे के बीच अल्ट्रासाउंड का अपॉइंटमेंट लिया। नियत समय पर पहुंचने के बाद उन्होंने 3100 रुपये का बिल कटवाया, लेकिन रेडियोलॉजी विभाग में एक घंटे तक इंतजार कराने के बावजूद उनकी बारी नहीं आई।

इसी दौरान ब्यूटी की तबीयत बिगड़ने लगी, उन्हें उल्टियां होने लगीं और कमजोरी महसूस होने लगी। सूरज ने जब कर्मचारियों से देरी का कारण पूछा, तो उन्हें कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला। पत्नी की हालत को देखते हुए सूरज ने बाहर किसी अन्य केंद्र से अल्ट्रासाउंड कराने का निर्णय लिया और अस्पताल से पैसे वापस मांगे। इस पर अस्पताल ने उन्हें सीनियर मैनेजर से संपर्क करने को कहा।
सूरज ने आरोप लगाया कि अपॉइंटमेंट डिपार्टमेंट और सीनियर मैनेजर से भी कोई मदद नहीं मिली। मजबूर होकर उन्होंने मोबाइल से घटना की रिकॉर्डिंग शुरू की, जिसके बाद अस्पताल कर्मचारी मनोजीत और अन्य स्टाफ ने सूरज से बदसलूकी की, उनका मोबाइल छीन लिया और धक्का-मुक्की के साथ मारपीट भी की। अंततः बिना पैसे लौटाए और बिना किसी चिकित्सा सहायता के दंपति को अस्पताल से बाहर निकाल दिया गया।

घटना के बाद सूरज ने आसनसोल उत्तर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई, लेकिन कई घंटे बीतने के बावजूद पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई। इससे निराश होकर उन्होंने आसनसोल-दुर्गापुर पुलिस कमिश्नर को भी लिखित शिकायत देकर न्याय की गुहार लगाई। सूरज का कहना है कि “यह सिर्फ हमारी लड़ाई नहीं, हर उस परिवार की है जो चिकित्सा सहायता लेने एक उम्मीद के साथ अस्पताल आता है। दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।”
फिलहाल अस्पताल प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। घटना को लेकर सामाजिक संगठनों और महिला अधिकार कार्यकर्ताओं में भी रोष बढ़ता दिख रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को संज्ञान लेकर त्वरित जांच करनी चाहिए।
स्थानीय लोगों ने भी घटना पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि एक प्रतिष्ठित अस्पताल में गर्भवती महिला के साथ ऐसा व्यवहार हो सकता है, तो आम लोगों की सुरक्षा और सेवा की गारंटी कहां है? अब देखना होगा कि पुलिस और जिला प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं और पीड़ित परिवार को कब तक न्याय मिलता है।














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