
दुर्गापुर : पश्चिम बर्धमान जिले के दुर्गापुर में श्रमिक राजनीति से जुड़ा एक गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की श्रमिक शाखा सीटू (CITU) के जिला समिति सदस्य सिद्धार्थ बसु ने आरोप लगाया है कि उन्हें राजनीतिक कारणों से उनके कार्यस्थल में प्रवेश से रोका जा रहा है।
घटना 9 जुलाई की है, जब केंद्रीय श्रम संहिता के विरोध में आयोजित हड़ताल का नेतृत्व करने के बाद सिद्धार्थ बसु अपने लेनिन सरणी स्थित एक निजी इस्पात कारखाने में काम पर लौटना चाह रहे थे। लेकिन, बसु का आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से जुड़े कुछ लोगों ने उन्हें कारखाने में प्रवेश करने से रोक दिया और यह कहा गया कि बिना ब्लॉक टीएमसी उपाध्यक्ष रिनटू पांजा और जिला टीएमसी अध्यक्ष नरेंद्रनाथ चक्रवर्ती की अनुमति के वह अंदर नहीं जा सकते।
बसु ने कहा, “मुझे बार-बार कारखाने से बाहर निकालने की कोशिश की जा रही है। टीएमसी से जुड़े श्रमिक नेता – पुकाई, श्रीकांत, प्रणब पाल, सागर गोराई आदि मुझसे लिखित अनुमति लाने की मांग कर रहे हैं।” उन्होंने इसे एक राजनीतिक षड्यंत्र बताते हुए कहा कि अगर ऐसी घटनाएं दोहराई जाती हैं, तो वह आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।

इस पूरे मामले को लेकर सिद्धार्थ बसु ने जिला शासक, महकमा शासक और पुलिस आयुक्त के पास लिखित शिकायत दर्ज कराई है। उनका कहना है कि यह लोकतंत्र के खिलाफ है कि किसी व्यक्ति को राजनीतिक विचारधारा के आधार पर काम से रोका जाए।
हालाँकि, टीएमसी के तीन नंबर ब्लॉक उपाध्यक्ष रिनटू पांजा ने इन आरोपों को सिरे से बेबुनियाद बताया है। उन्होंने पलटवार करते हुए कहा, “हो सकता है उसने (सिद्धार्थ बसु) ने कारखाने में कुछ अनुशासनहीनता की हो, जिसके कारण प्रबंधन ने उसे बाहर किया है। इसमें टीएमसी का कोई लेना-देना नहीं है।” उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी का दरवाजा सबके लिए खुला है, झूठे आरोप लगाकर राजनीतिक रोटियां सेंकने से फायदा नहीं होगा।

इस पूरे प्रकरण ने दुर्गापुर में राजनीतिक द्वंद्व और श्रमिक अधिकारों की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ श्रमिक संगठन इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रहे हैं, तो दूसरी ओर टीएमसी नेता इनकार कर रहे हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है और क्या सिद्धार्थ बसु को न्याय और सुरक्षा मिल पाती है या नहीं।














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