
आसनसोल : शनिवार को सलानपुर थाना क्षेत्र के ढांगुरी मौजा में राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच-419 के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू होते ही इलाके में तनाव का माहौल उत्पन्न हो गया। गोविंदपुर से चौरंगी तक सड़क निर्माण की योजना के तहत भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में ग्रामीणों और प्रशासन के बीच दस्तावेजी विसंगतियों को लेकर टकराव गहरा गया है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि जिस भूमि पर वर्षों से वे काबिज हैं और जिसके कानूनी दस्तावेज उनके पास हैं, उसे सरकारी रिकॉर्ड में ‘खास जमीन’ यानी अधिग्रहण योग्य भूमि के रूप में दर्ज किया गया है। ग्रामीणों ने कहा कि यह भूमि उनकी पुश्तैनी संपत्ति है, लेकिन प्रशासनिक दस्तावेजों में विसंगतियां पाई गई हैं।

ढांगुरी मौजा के प्लॉट संख्या 702, जिसमें लगभग आठ एकड़ भूमि शामिल है, सबसे ज्यादा विवादित साबित हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन ने इस भूमि का निरीक्षण बिना पूर्व सूचना के किया, जिससे वे आक्रोशित हैं। वहीं भूमि अधिग्रहण अधिकारी पलाश नाथ ने स्पष्ट किया कि उनकी टीम ने भूमि अभिलेख कार्यालय और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर भूमि का निरीक्षण किया और ग्रामीणों को अपने दस्तावेज़ संबंधित कार्यालय में जमा करने की सलाह दी गई है।
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण का नक्शा और भूमि अभिलेख कार्यालय की जानकारी, दोनों ही उनके निजी दस्तावेजों से मेल नहीं खा रहे हैं। इससे यह संदेह उत्पन्न हो रहा है कि या तो कोई प्रशासनिक त्रुटि हुई है या जानबूझकर जमीन को ‘खास जमीन’ के रूप में चिह्नित कर किसानों की जमीन छीनी जा रही है।

एक सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा, “यह केवल भूमि अधिग्रहण का मामला नहीं है, बल्कि यह सरकारी तंत्र की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़ा करता है। यदि लोगों के पास वैध दस्तावेज हैं, फिर भी उनके हक को नजरअंदाज किया जा रहा है, तो यह गंभीर चिंता का विषय है।”
सरकारी अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि सभी दस्तावेजों की गहन जाँच की जाएगी और ग्रामीणों को अपनी बात रखने का पूरा मौका दिया जाएगा। वहीं, ग्रामीणों ने मांग की है कि भूमि अधिग्रहण से पहले सभी दस्तावेजों का सार्वजनिक रूप से मिलान हो और पारदर्शी जांच कमेटी गठित की जाए।














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