शनिवार-रविवार छुट्टी की आड़ में बिजली विभाग की मनमानी जारी

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आसनसोल :  बिजली विभाग की लापरवाही और कार्यप्रणाली की खामियों से जनता लगातार त्रस्त होती जा रही है। खासकर शनिवार और रविवार को अवकाश का हवाला देकर विभागीय कर्मचारी जन समस्याओं की अनदेखी कर रहे हैं। ताजा मामला आसनसोल के सेनरेल क्षेत्र अंतर्गत गांधीनगर का है, जहाँ एक परिवार को दो दिनों से बिना बिजली के जीवन यापन करना पड़ रहा है, लेकिन विभाग की ओर से कोई समाधान नहीं किया गया है।

पीड़ित परिवार का कहना है कि शुक्रवार शाम से उनके घर की बिजली पूरी तरह चली गई। उन्होंने तुरंत पश्चिम बंगाल राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (WBSEDCL) को इसकी सूचना दी और ऑनलाइन माध्यम से शिकायत दर्ज की। साथ ही, उन्होंने फोन और ईमेल के जरिये भी विभाग को मामले से अवगत कराया। इसके बावजूद विभागीय कर्मियों ने मौके पर आना तो दूर, फोन तक उठाना उचित नहीं समझा।

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शनिवार को जब परिजन खुद विभाग के दफ्तर पहुँचे तो वहाँ बताया गया कि “शनिवार और रविवार को कोई भी फील्ड वर्क नहीं होता। टीम उपलब्ध नहीं है, सोमवार को आएँ।” सवाल यह है कि अगर किसी घर में आग लग जाए, शॉर्ट सर्किट हो जाए या मरीज हो—क्या तब भी विभाग इसी प्रकार ‘अवकाश’ का बहाना बनाकर नागरिकों को असहाय छोड़ देगा?

पीड़ित ने कहा, “हमारे घर में बुजुर्ग और बच्चे हैं। गर्मी में पंखा नहीं, रात में रोशनी नहीं, मोबाइल तक चार्ज नहीं हो पा रहा। ऐसा लगता है जैसे हम किसी पिछड़े गांव में जी रहे हैं।”

स्थानीय निवासियों ने भी विभाग के इस रवैये पर नाराज़गी जताई है। उनका कहना है कि गांधीनगर, सेनरेल जैसे क्षेत्रों में बिजली विभाग की सेवाएं दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही हैं। शिकायतों के बावजूद अधिकारी मौन हैं। इमरजेंसी सेवा जैसी ज़िम्मेदारी को ‘सप्ताहांत’ की छुट्टी के बहाने टालना न सिर्फ अनुचित है बल्कि यह प्रशासनिक संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है।

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अब बड़ा सवाल यह है कि बिजली जैसी बुनियादी सेवा में अगर लापरवाही जारी रही तो आमजन किससे उम्मीद रखेगा? कब तक जनता शिकायतें लेकर भटकेगी और कब प्रशासन इस तरह की मनमानी पर सख्त कदम उठाएगा?

स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन और बिजली विभाग के उच्चाधिकारियों से मांग की है कि गांधीनगर के इस प्रकरण की जांच कर जिम्मेदार कर्मियों पर कार्रवाई की जाए और भविष्य में आपातकालीन सेवाओं को सातों दिन सक्रिय रखने के लिए ठोस नीति बनाई जाए। अन्यथा आमजन को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

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