
आसनसोल : बरसात के मौसम में दामोदर नदी से अवैध बालू निकासी के खिलाफ आसनसोल पुलिस ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा अभियान चलाया। आसनसोल साउथ थाना पुलिस ने सोमवार रात गुप्त सूचना के आधार पर डामरा घाट क्षेत्र में छापेमारी कर 11 ट्रैक्टर जब्त किए। ये ट्रैक्टर बालू से लदे हुए थे और अवैध खनन में लिप्त पाए गए।
इस छापेमारी के दौरान पुलिस को देख कई ड्राइवर और मजदूर मौके से फरार हो गए, हालांकि कुछ को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। सभी जब्त ट्रैक्टरों को थाने में लाकर खड़ा कर दिया गया है और मामले की जाँच जारी है।

बरसात में बालू खनन पर रोक के बावजूद जारी था अवैध काम
गौरतलब है कि मानसून के दौरान दामोदर जैसी नदियों में बालू खनन पर पूर्ण प्रतिबंध होता है। यह राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के निर्देशों के तहत लागू होता है ताकि नदियों के पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान न पहुँचे। लेकिन इसके बावजूद बालू माफिया चोरी-छिपे खनन कर रहे थे, जिससे यह स्पष्ट होता है कि प्रशासनिक निगरानी में गंभीर खामियाँ हैं।
स्थानीय जनता बोली — कार्रवाई के बाद भी दोबारा शुरू होता है खेल
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की छापेमारी पहले भी हुई है, लेकिन कुछ समय बाद खनन फिर शुरू हो जाता है। उनका कहना है कि जमीनी स्तर पर स्थायी समाधान और मुख्य सरगनाओं की गिरफ्तारी के बिना यह कार्रवाई सिर्फ औपचारिकता बनकर रह जाती है।

क्या बालू माफियाओं के नाम उजागर होंगे?
पुलिस ने अब तक किसी माफिया या मुख्य आरोपी के नाम की घोषणा नहीं की है। इससे संदेह गहराता जा रहा है कि क्या यह अभियान वास्तव में प्रभावी होगा या कुछ दिनों बाद मामला फिर से ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।
प्रशासन पर बढ़ा दबाव, मांग उठी स्थायी कार्रवाई की
इस कार्रवाई के बाद जिला प्रशासन पर यह दबाव है कि वह अवैध खनन के खिलाफ सख्त और स्थायी कदम उठाए। कई सामाजिक संगठनों और स्थानीय नेताओं ने जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई और स्थायी निगरानी तंत्र की माँग की है।
स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर भी उठे सवाल
जनता का यह भी कहना है कि इतनी बड़ी मात्रा में बालू निकासी बिना स्थानीय मिलीभगत के संभव नहीं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या प्रशासन इस बार उदाहरण पेश करता है या फिर यह कार्रवाई भी पूर्व की तरह मात्र दिखावा बनकर रह जाएगी।
डामरा घाट से जब्त हुए ट्रैक्टर भले ही अवैध खनन की पुष्टि कर रहे हों, लेकिन असली लड़ाई अब माफिया नेटवर्क की पहचान, गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई की है — जो कि प्रशासन की नीयत और पारदर्शिता की असली परीक्षा होगी।














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