
आसनसोल : गुरुवार को आसनसोल अदालत परिसर में वकीलों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने अदालत परिसर में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और न्यायिक प्रशासन के रवैये पर नाराज़गी जताई। अधिवक्ताओं का आरोप है कि 18 जुलाई को अदालत के गार्डों ने उनके दो सहयोगियों—विनय चौधरी और तृष्णा राय—के साथ मारपीट की थी। इस घटना के विरोध में आज वकीलों ने एकजुट होकर कामकाज ठप करते हुए आवाज बुलंद की।
वकीलों का कहना है कि जब उन्होंने इस मामले की शिकायत न्यायाधीश से की तो उन्हें कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला। इससे वे बेहद आहत और नाराज हैं। अधिवक्ताओं का कहना है कि “हम प्रशासन के साथ सहयोग करना चाहते हैं, लेकिन जब हमारे साथ ही दुर्व्यवहार होगा और कोई सुनवाई नहीं होगी, तो हमें आंदोलन के रास्ते पर जाना पड़ेगा।”

प्रदर्शनकारी वकीलों ने बताया कि 18 जुलाई को अदालत परिसर में विनय चौधरी और तृष्णा राय के साथ सुरक्षा गार्डों ने न केवल बदसलूकी की, बल्कि शारीरिक हमला भी किया। घटना के बाद जब इसकी शिकायत उच्चाधिकारियों और न्यायिक अधिकारियों से की गई, तब भी इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
वकीलों का यह भी कहना है कि यह सिर्फ दो अधिवक्ताओं पर हमला नहीं, बल्कि पूरे अधिवक्ता समाज की गरिमा पर प्रहार है। “अगर अदालत परिसर में ही हम सुरक्षित नहीं हैं, तो न्याय की रक्षा कैसे करेंगे?”—प्रदर्शन कर रहे एक वरिष्ठ अधिवक्ता ने सवाल उठाया।

विरोध कर रहे अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी है कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलेगा और दोषी गार्डों पर उचित कार्रवाई नहीं की जाएगी, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। कई वकीलों ने काली पट्टी बांधकर मौन प्रदर्शन भी किया और ‘वकीलों की सुरक्षा सुनिश्चित करो’ जैसे नारे लगाए।
घटना के बाद से अदालत परिसर में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। सुनवाई का कार्य भी प्रभावित हुआ है और पक्षकारों को परेशानी झेलनी पड़ी है। अधिवक्ताओं ने साफ कर दिया है कि प्रशासन को यदि स्थिति सामान्य बनानी है, तो दोषियों को दंडित करना ही होगा।














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