Breaking News
पहली सोमवारी से पहले सिद्धेश्वर मंदिर में तैयारियां तेज, मंत्री ने व्यवस्थाओं का जायजा लेकर दिए जरूरी निर्देश आसनसोल क्लब में नारी उत्कर्ष मेले का आगाज, प्रतिभा और आत्मनिर्भरता के मंच पर महिलाओं ने दिखाई क्षमता आसनसोल में 58वीं राज्य निशानेबाजी प्रतियोगिता तीन अगस्त से, देशभर के लिए तैयार होंगे प्रतिभावान निशानेबाज पश्चिम बर्धमान में जनगणना 2027 का शुभारंभ, जागरूकता रथ रवाना; स्व-गणना से पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर रितिक रुज हत्याकांड से आसनसोल में आक्रोश, भगत सिंह मोड़ पर सड़क जाम कर न्याय की मांग उठी बर्दवान संदिग्ध आतंकी मामले में महिला सहयोगी गिरफ्तार, एसटीएफ खंगाल रही अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के तार

हाईकोर्ट ने लगाया निगम पर सवाल, अवैध निर्माण पर विवाद बढ़ा

Facebook
Twitter
WhatsApp

WhatsApp Image 2024 07 12 at 13.27.59

आसनसोल :  शनिवार को आसनसोल नगर निगम और जमुरिया-रानीगंज औद्योगिक क्षेत्र में चल रहे अवैध निर्माण को लेकर विवाद और भी गहरा गया है। शुक्रवार को कोलकाता हाईकोर्ट के सिंगल बेंच के न्यायाधीश गौरांग कांत ने इस मसले पर सख्त रुख अपनाते हुए निगम पर सवाल खड़े किए और नगर निगम के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। कोर्ट की यह टिप्पणी उस समय आई जब एक निजी इस्पात कारखाना प्रबंधन ने निगम द्वारा अवैध निर्माण तोड़ने की प्रक्रिया पर आपत्ति जताते हुए न्यायालय की शरण ली।

500 करोड़ से अधिक का जुर्माना, फिर भी निर्माण जस का तस
आसनसोल नगर निगम ने बीते एक वर्ष में जमुरिया और रानीगंज के औद्योगिक क्षेत्रों में कई कारखानों पर अवैध निर्माण का आरोप लगाते हुए 500 करोड़ रुपए से अधिक का जुर्माना लगाया था। लेकिन न तो यह जुर्माना अब तक अदा किया गया है, और न ही अवैध निर्माण को हटाया गया है। कोर्ट ने सवाल खड़ा किया कि—”अगर कोई निर्माण वास्तव में अवैध है, तो क्या सिर्फ जुर्माना अदा करने से वह वैध बन जाता है?”

IMG 20250511 WA0050

निगम की दलील : श्रमिकों की रोजी-रोटी का सवाल
नगर निगम के कानूनी सलाहकार का कहना है कि इन निर्माणों को तोड़ने से पहले श्रमिकों के हितों को भी देखना होगा, क्योंकि इन कारखानों में हजारों लोग कार्यरत हैं। ऐसे में अवैध निर्माण हटाने से पहले कारखाना प्रबंधन को समय देना आवश्यक था ताकि उनकी आजीविका पर सीधा प्रभाव न पड़े।

IMG 20250802 WA0061

मेयर का जवाब : कोर्ट आदेश की कॉपी नहीं मिली
नगर निगम के मेयर विधान उपाध्याय ने कहा कि उन्हें अब तक कोलकाता हाईकोर्ट के किसी आदेश की प्रतिलिपि नहीं मिली है, इसलिए इस संबंध में वह कोई टिप्पणी नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि एक साल पहले जब इन कारखानों पर कार्रवाई शुरू हुई थी, तो उनके प्रतिनिधियों की उपस्थिति में नपाई की गई थी और अवैध निर्माण की पुष्टि हुई थी। उस समय कारखाना प्रबंधन ने समय मांगा था, जिसे निगम ने स्वीकार किया।

 

 

IMG 20250522 WA0045

विपक्ष का आरोप : निगम और कारखाना मालिकों की मिलीभगत
भारतीय जनता पार्टी के नेता और नगर निगम के पूर्व मेयर जितेंद्र तिवारी ने इस मुद्दे पर निगम को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि—”यह पूरा मामला निगम और कारखाना मालिकों की मिलीभगत का है। निगम जानबूझकर कार्रवाई नहीं कर रहा और मामले को दबाने की कोशिश कर रहा है।”उन्होंने कहा कि भाजपा की ओर से जब प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई, तभी जाकर यह मामला सामने आया। यदि ऐसा नहीं होता तो नगर निगम इस मसले को पूरी तरह से छुपा लेता।

निगम पर लगे आरोपों को किया खारिज
विधान उपाध्याय ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि—”नगर निगम कभी कोई अवैध कार्य नहीं करता। हमारा उद्देश्य क्षेत्र का समग्र विकास है और उसमें सभी पक्षों को साथ लेकर चलना होगा।”उन्होंने यह भी कहा कि जिस कारखाने ने अदालत में याचिका दायर की है, उनके प्रतिनिधि हाल ही में नगर निगम आए थे और आपसी सहमति से समाधान निकालने की बात कर रहे थे।

कारखाना प्रबंधन की सफाई
जिस इस्पात कारखाने के खिलाफ कार्रवाई हुई और बाद में अदालत में मामला गया, उसके एक वरिष्ठ अधिकारी आशुतोष चौधरी ने कहा कि यह पूरा मामला किसी “गलतफहमी” का परिणाम है। उन्होंने कहा—”हमारे और निगम के बीच हमेशा सहयोगात्मक संबंध रहे हैं। हम हर समस्या का समाधान बातचीत से करने में विश्वास रखते हैं। अगर कोई गलतफहमी हुई है, तो उसे भी बातचीत से सुलझा लेंगे।”

IMG 20250802 WA0062

राजनीतिक आरोपों और कानूनी सवालों के बीच फंसा विकास
इस पूरे घटनाक्रम ने नगर निगम की कार्यप्रणाली और औद्योगिक विकास की प्रक्रियाओं पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। एक ओर जहां हाईकोर्ट ने निगम पर सीधा सवाल उठाया है, वहीं विपक्ष इसे भ्रष्टाचार और मिलीभगत का उदाहरण बता रहा है। दूसरी ओर, निगम यह कह कर बचाव कर रहा है कि उन्हें श्रमिकों की चिंता है और हर कदम सोच-समझकर उठाया गया है। आने वाले दिनों में यह मामला और भी गरमाने की संभावना है, क्योंकि इसमें न्यायिक जांच के साथ-साथ राजनीतिक टकराव भी स्पष्ट रूप से नजर आने लगा है।

Leave a Comment

Leave a Comment

[democracy id="1"]

Share Market

Also Read This

Gold & Silver Price

Our Visitor

0 4 1 7 5 6
Users Today : 5
Users Yesterday : 16