
आसनसोल : मुर्गा सौल गुरुद्वारा में रविवार को गुरु गोविंद सिंह स्टडी सर्किल और गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के संयुक्त तत्वावधान में बच्चों के लिए ‘राग रतन कीर्तन मुकाबला’ प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। इस सांस्कृतिक आयोजन में पश्चिम बंगाल और धनबाद के विभिन्न इलाकों से आए तकरीबन 35 बच्चों ने हिस्सा लिया।

16 वर्षों से जारी परंपरा
प्रतियोगिता का उद्देश्य बच्चों को सिख धर्म की सांस्कृतिक धरोहर और कीर्तन परंपरा से जोड़ना है। पूर्वी भारत गुरु गोविंद सिंह स्टडी सर्किल के सचिव गुरविंदर सिंह ने बताया कि बीते 16 वर्षों से यह प्रतियोगिता लगातार आयोजित हो रही है। उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा के बीच बच्चों को अपनी जड़ों और गुरवाणी के रागों से परिचित कराना आवश्यक है।

गुरु नानक जी की शिक्षाओं पर जोर
गुरविंदर सिंह ने कहा कि गुरु नानक देव जी ने हमेशा राग और कीर्तन के माध्यम से गुरवाणी सिखाने पर बल दिया। इसी सोच को आगे बढ़ाने के लिए यह प्रतियोगिता रखी जाती है। इसमें बच्चों को राग पहचानने, गाने की लय और भावनात्मक अभिव्यक्ति पर आंका गया।

सिख समाज में उत्साह और समर्थन
आयोजन के दौरान गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पदाधिकारियों और स्थानीय सिख समाज ने बच्चों का उत्साहवर्धन किया। प्रतियोगिता में शामिल बच्चों ने विविध रागों में शबद कीर्तन प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से बच्चों का हौसला बढ़ाया।

धार्मिक और सांस्कृतिक जुड़ाव का संदेश
यह आयोजन न केवल बच्चों के संगीत कौशल को निखारने का माध्यम बना, बल्कि उन्हें अपनी धार्मिक विरासत और मूल्यों से जोड़ने का भी अवसर प्रदान किया। आयोजकों ने घोषणा की कि भविष्य में भी इस तरह की प्रतियोगिताएं नियमित रूप से जारी रहेंगी।














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