
आसनसोल : सावन के पावन महीने की अंतिम और चौथी सोमवारी पर आसनसोल शिल्पांचल स्थित प्रसिद्ध चंद्रचूड़ शिव मंदिर में श्रद्धा और भक्ति का अनोखा संगम देखने को मिला। सोमवार तड़के सुबह 3 बजे से ही मंदिर परिसर में भक्तों की लंबी कतारें लग गईं। सिर पर जलकलश, हाथों में बेलपत्र, धतूरा, पुष्प और मुख पर ‘हर हर महादेव’ एवं ‘बोल बम’ के जयघोष के साथ श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ को जल अर्पित करने पहुंचे।यह दिन शिवभक्तों के लिए अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।

मान्यता है कि सावन की सोमवारी पर शिवलिंग पर जलाभिषेक करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन की समस्त बाधाएं दूर होती हैं। इसी आस्था के साथ सोमवार को हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने चंद्रचूड़ मंदिर पहुंचकर भगवान शिव के चरणों में शीश नवाया।चंद्रचूड़ मंदिर प्रबंधन समिति ने इस विशेष दिन के लिए व्यापक तैयारी की थी। भक्तों की सुविधा हेतु अलग-अलग कतारें बनाई गई थीं, साथ ही पेयजल, प्राथमिक चिकित्सा, स्वच्छता और मार्गदर्शन के लिए स्वयंसेवकों की तैनाती की गई थी। समिति के वरिष्ठ सदस्य दीपक झा ने जानकारी दी कि इस वर्ष लगभग 29,000 से अधिक भक्तों ने दर्शन और जलाभिषेक किया, जो पिछले वर्षों की तुलना में कहीं अधिक है।सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। स्थानीय पुलिस प्रशासन ने मंदिर परिसर और उसके आसपास सीसीटीवी कैमरे, महिला पुलिस बल और यातायात नियंत्रण के लिए विशेष बलों की तैनाती की। एनसीसी के छात्र-छात्राएं एवं समाजसेवियों की टीम ने भी श्रद्धालुओं को सहायता पहुंचाई।

भक्तों की श्रद्धा और अनुभव भी बेहद भावुक रहे। एक वृद्ध महिला श्रद्धालु रुक्मिणी देवी ने कहा, “मैं पिछले 30 वर्षों से हर सावन सोमवार को यहां आती हूं। भोलेबाबा की कृपा से आज भी चल-फिर पा रही हूं।” वहीं युवा भक्त अंशु सिंह ने कहा, “यहां का वातावरण अत्यंत आध्यात्मिक और दिव्य है, जो जीवन में सकारात्मक ऊर्जा भर देता है।”चंद्रचूड़ मंदिर के साथ ही आसनसोल के अन्य प्रमुख शिवालयों – जैसे माँ घागरबूढ़ी परिसर स्थित महाकाल मंदिर, जी.टी. रोड के महावीर स्थान मंदिर, बर्नपुर के शिव स्थान मंदिर और स्टेशन रोड के जोगिस्थान मंदिर – में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।हर स्थान पर ‘हर हर महादेव’ और ‘नमः पार्वतीपतये हर हर महादेव’ के उद्घोष से वातावरण भक्तिमय बन गया। यह आयोजन न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि सामाजिक सौहार्द का भी अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करता है, जहां हर जाति, धर्म और वर्ग के लोग मिलकर भक्ति में लीन होकर एकता का संदेश दे रहे हैं।














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