Breaking News
पहली सोमवारी से पहले सिद्धेश्वर मंदिर में तैयारियां तेज, मंत्री ने व्यवस्थाओं का जायजा लेकर दिए जरूरी निर्देश आसनसोल क्लब में नारी उत्कर्ष मेले का आगाज, प्रतिभा और आत्मनिर्भरता के मंच पर महिलाओं ने दिखाई क्षमता आसनसोल में 58वीं राज्य निशानेबाजी प्रतियोगिता तीन अगस्त से, देशभर के लिए तैयार होंगे प्रतिभावान निशानेबाज पश्चिम बर्धमान में जनगणना 2027 का शुभारंभ, जागरूकता रथ रवाना; स्व-गणना से पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर रितिक रुज हत्याकांड से आसनसोल में आक्रोश, भगत सिंह मोड़ पर सड़क जाम कर न्याय की मांग उठी बर्दवान संदिग्ध आतंकी मामले में महिला सहयोगी गिरफ्तार, एसटीएफ खंगाल रही अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के तार

घाटाल में शव को केले के राफ्ट पर ले जाने से हड़कंप

Facebook
Twitter
WhatsApp

WhatsApp Image 2024 07 12 at 13.27.59

मिदनापुर : ‘श्मशान जैसी शांति’ की कहावत घाटाल में बेमानी हो गई है, जहां जलजमाव के बीच अंतिम यात्रा भी चुनौती बन गई है। मानसून के दौरान गालूडीह बांध से रुक-रुककर छोड़े जा रहे पानी के कारण घाटाल नगरपालिका के अधिकांश इलाके जलमग्न हैं। इसी बीच एक वीडियो ने प्रशासन की संवेदनशीलता और आपदा प्रबंधन की हकीकत को उजागर कर दिया है।सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो में केले के तनों को जोड़कर बने राफ्ट पर एक शव को ताड़ की लकड़ी से बनी छोटी नाव द्वारा खींचते हुए देखा गया। शव घाटाल नगरपालिका के वार्ड संख्या 9 की दिवंगत पूर्व पार्षद की पत्नी मनसा चौधरी का था,

IMG 20250511 WA0050

जिनका रविवार को निधन हुआ। भारी जलभराव के कारण सड़क मार्ग से शव को श्मशान घाट तक ले जाना संभव नहीं था। मजबूरन परिजनों को यह तरीका अपनाना पड़ा।यह दृश्य सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बन गया। आलोचकों ने प्रशासन की विफलता पर सवाल खड़े किए। भाजपा विधायक शीतल कपाट ने कहा, “अगर एक पूर्व पार्षद की पत्नी को ऐसे अंतिम विदाई दी गई, तो आम जनता की स्थिति की कल्पना की जा सकती है।” वहीं तृणमूल कांग्रेस के विधायक अजीत माइती ने इसे राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया और कहा कि जलभराव की स्थिति में इस तरह शव ले जाने की पुरानी परंपरा रही है।

IMG 20240918 WA0025

प्रशासनिक अधिकारी एसडीओ सुमन विश्वास ने सफाई दी कि नगर में नावों की व्यवस्था की गई है और नियंत्रण कक्ष भी चालू है, लेकिन उन्हें इस मामले की कोई जानकारी नहीं दी गई। नगर पालिका चेयरमैन तुहिनकांति बेरा ने भी यही तर्क दोहराया कि अगर सूचना नहीं मिलेगी तो मदद कैसे की जा सकती है।गौरतलब है कि 19 जून से 3 अगस्त के बीच घाटाल चार बार बाढ़ग्रस्त हुआ है। वर्तमान में 13 वार्ड जलमग्न हैं। लेकिन सरकारी तैयारियों के बावजूद ऐसी घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि कागज़ों पर योजनाएं ज़रूर हैं, पर ज़मीनी हकीकत अब भी लोगों को केले के राफ्ट पर अंतिम यात्रा के लिए विवश कर रही है।

Leave a Comment

Leave a Comment

[democracy id="1"]

Share Market

Also Read This

Gold & Silver Price

Our Visitor

0 4 1 7 5 4
Users Today : 3
Users Yesterday : 16