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बांध टूटने से 80 घर डूबे, नगर निगम पर लापरवाही का आरोप

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आसनसोल :  शुक्रवार को आसनसोल नगर निगम क्षेत्र के वार्ड संख्या 56 अंतर्गत छीना मस्त इलाके में भयावह स्थिति उत्पन्न हो गई, जब एक पुराने तालाब का बांध अचानक टूट गया। बांध के टूटते ही तेज़ बहाव में पानी बस्तियों में घुस गया और करीब 80 घरों को जलमग्न कर दिया। संकरी गलियों में पानी कमर तक भर गया और लोगों को जान बचाने के लिए ऊँचे स्थानों पर भागना पड़ा।

स्थानीय निवासी राजेश मंडल ने बताया, “हमने कई बार नगर निगम को इसकी ख़राब हालत की जानकारी दी थी, लेकिन हमेशा आश्वासन मिला, काम नहीं हुआ।”

घटना सुबह के समय घटी जब लोग दैनिक कार्यों में व्यस्त थे। अचानक तेज़ आवाज़ के साथ बांध टूटा और भारी मात्रा में पानी तेज़ी से रिहायशी इलाकों में घुस गया। लोग अपने ज़रूरी सामान तक नहीं निकाल सके। घरों में रखे कपड़े, फर्नीचर, दस्तावेज, बच्चों के स्कूल बैग और किताबें पानी में डूब गए।

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महिलाएं अपने बच्चों को गोद में लेकर भागती नजर आईं, जबकि युवाओं और पड़ोसियों ने बुज़ुर्गों को कंधे का सहारा देकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। कई दुकानें बंद रहीं और सड़कों पर सन्नाटा छा गया। बाजार जलमग्न हो गया और गलियाँ किसी नदी की धारा जैसी प्रतीत होने लगीं।

नगर निगम की ओर से कोई भी राहत दल प्रारंभिक क्षणों में मौके पर नहीं पहुंचा। स्थानीय लोग बाल्टियों और मगों से पानी बाहर निकालते रहे। बाद में प्रशासन ने राहत कार्य शुरू किया। प्रभावित परिवारों को सूखा भोजन, पीने का पानी और प्लास्टिक की दरी मुहैया कराई गई है।

विशेषज्ञों ने स्पष्ट कहा है कि यदि समय रहते बांध की मरम्मत होती, तो यह आपदा टल सकती थी। उनका मानना है कि तालाब का बांध पहले से ही कमजोर था और लगातार हो रही वर्षा ने इसे और कमजोर कर दिया था।

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प्रशासन की ओर से कहा गया है कि बांध टूटने की घटना की जाँच कराई जाएगी और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। साथ ही, बांध की मरम्मत और भविष्य में ऐसी घटना न हो इसके लिए स्थायी समाधान पर काम किया जा रहा है।

क्षति का आकलन भी शुरू हो चुका है, ताकि पीड़ितों को उचित सहायता राशि दी जा सके। छीना मस्त इलाके के लोग फिलहाल डरे हुए और नाराज़ हैं, क्योंकि वे मानते हैं कि यह आपदा सिर्फ प्राकृतिक नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम भी है।

नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से भी जवाब की माँग की जा रही है। फिलहाल पूरा क्षेत्र कीचड़, पानी और असुरक्षा की स्थिति में जूझ रहा है।

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