
बर्दवान : भारी वर्षा के बाद दामोदर नदी में पानी बढ़ने से बर्दवान जिले के जमालपुर के सादीपुर इलाके में शुक्रवार को एक दुर्लभ गंगा की डॉल्फिन देखने को मिली। लगभग तीन वर्षों के लंबे अंतराल के बाद दामोदर नदी में डॉल्फिन दिखने की यह अनोखी घटना सामने आई है। इससे पहले अक्टूबर 2022 में गलसी के शिला घाट पर डॉल्फिन दिखाई दी थी। सामान्यतः कटवा के अजय और भागीरथी नदियों में डॉल्फिन देखी जाती है, लेकिन दामोदर नदी में इनका आना बहुत कम होता है।
घटना के अनुसार, गुरुवार रात स्थानीय मछुआरे प्रशांत माझी रोज़ की तरह दामोदर नदी में इलिश मछली की तलाश में जाल डालकर लौट आए थे। शुक्रवार सुबह जब वह जाल निकालने पहुंचे तो उन्हें लगा कि कोई बड़ी मछली फंसी है। जाल खींचने के बाद उन्होंने देखा कि उसमें लगभग 50-55 किलो वज़न की एक डॉल्फिन फंसी हुई है। प्रशांत माझी ने बिना समय गंवाए जाल काटकर डॉल्फिन को सुरक्षित रूप से वापस नदी में छोड़ दिया। उनका कहना है कि यह पहली बार है जब उन्होंने अपने जीवन में दामोदर नदी में डॉल्फिन देखी है।

स्थानीय मछुआरों का कहना है कि हाल के दिनों में भारी बारिश के कारण दामोदर नदी में जलस्तर तेज़ी से बढ़ा है। इससे इलिश मछलियों के आने की संभावना बढ़ गई है। इसी कारण बड़ी संख्या में मछुआरे नदी में जाल डाल रहे हैं। 2024 में भी भारी वर्षा के बाद जमालपुर के इसी क्षेत्र में दामोदर नदी से इलिश मछलियां पकड़ी गई थीं, जिनकी नीलामी कर ऊँचे दाम पर बिक्री हुई थी। इस बार भी मछुआरों को उम्मीद है कि जलस्तर बढ़ने से इलिश मछली का आगमन होगा, जिससे उनकी आमदनी में वृद्धि होगी।
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि गंगा डॉल्फिन (प्लैटनिस्टा गैंगेटिका) भारत की राष्ट्रीय जलीय जीव है और यह मीठे पानी में पाई जाती है। यह प्रजाति विलुप्तप्राय श्रेणी में आती है, इसलिए इनका सुरक्षित रहना और प्राकृतिक आवास में वापसी अत्यंत आवश्यक है। दामोदर जैसी औद्योगिक क्षेत्रों से गुजरने वाली नदियों में डॉल्फिन का दिखना नदी की स्वच्छता और जैव विविधता का संकेत माना जाता है। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि भारी बारिश और जल प्रवाह में वृद्धि के कारण डॉल्फिन अपने प्राकृतिक प्रवास के दौरान दामोदर नदी में पहुंची होगी।

ग्रामीणों और मछुआरों ने प्रशांत माझी के इस कदम की सराहना की है। उनका कहना है कि यदि उन्होंने जाल काटकर डॉल्फिन को मुक्त नहीं किया होता तो यह दुर्लभ जीव शायद जीवित न रह पाता। प्रशासन और पर्यावरण संगठनों ने भी इस घटना को सकारात्मक संकेत बताते हुए नदी के जल और जैव विविधता संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता पर बल दिया है।














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