
रानीगंज : बालू माफियाओं के बढ़ते आतंक और पुलिस प्रशासन की कथित निष्क्रियता के खिलाफ शनिवार को रानीगंज में भारतीय जनता पार्टी ने जोरदार विरोध-प्रदर्शन किया। जिला अध्यक्ष देवतानु भट्टाचार्य के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ता रानीगंज थाने के बाहर जमा हुए और पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने धरना देते हुए आरोप लगाया कि प्रशासन कानून-व्यवस्था संभालने के बजाय माफियाओं को बचाने में जुटा है।
भट्टाचार्य ने कहा कि दामोदर नदी घाट से लेकर रानीगंज और अंडाल नदी घाट तक अवैध रेत खनन धड़ल्ले से चल रहा है और इसमें पुलिस की मिलीभगत साफ दिख रही है। उन्होंने दावा किया कि कई पुलिस अधिकारी साफ कहते हैं—“जब तक ‘दिदी’ का आदेश नहीं, तब तक कार्रवाई नहीं।” इससे यह स्पष्ट है कि पुलिस स्वतंत्र रूप से काम करने के बजाय राजनीतिक इशारों पर चल रही है।

भाजपा नेताओं ने चेतावनी दी कि अगर बालू माफियाओं पर तत्काल लगाम नहीं लगाई गई तो आंदोलन को जिला मुख्यालय से लेकर कोलकाता तक विस्तारित किया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान माहौल तनावपूर्ण रहा, लेकिन किसी बड़े टकराव की सूचना नहीं मिली।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि अवैध रेत खनन से सरकारी राजस्व को भारी नुकसान हो रहा है। साथ ही, नदी किनारे बसे गाँवों में कटाव और बाढ़ का खतरा बढ़ रहा है, जिससे लोगों का जीवन और आजीविका दोनों संकट में हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा।
भाजपा ने मांग रखी कि न केवल बालू माफियाओं पर, बल्कि उन्हें संरक्षण देने वाले पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों पर भी सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह मामला अब केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि राजनीतिक टकराव का केंद्र बन चुका है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध खनन से नदियों की पारिस्थितिकी पर गंभीर असर पड़ रहा है। रेत की अंधाधुंध निकासी से नदी का प्राकृतिक बहाव बदल रहा है, जिससे कटाव, जलस्तर में कमी और आसपास की कृषि भूमि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
रानीगंज का यह प्रदर्शन आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति में बालू माफिया मुद्दे को और अधिक उभार सकता है, क्योंकि विपक्ष इसे सरकार की नाकामी के रूप में भुनाने की कोशिश में है, जबकि सरकार पर दबाव है कि वह सख्त कार्रवाई कर अपनी छवि बचाए।














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