
रानीगंज : रविवार को रानीगंज के बल्लभपुर क्षेत्र के भट्टाचार्या पाड़ा में उस समय सनसनी फैल गई, जब नाले के निर्माण कार्य के दौरान मिट्टी की खुदाई में एक प्राचीन शिवलिंग मिला। इस अप्रत्याशित खोज ने पूरे इलाके को श्रद्धा और उत्साह से भर दिया।
स्थानीय लोगों के अनुसार, एक गली के भीतर निकासी नाले का निर्माण कार्य चल रहा था। मजदूर जब मिट्टी खोद रहे थे, तभी उनके औजार से एक ठोस पत्थर जैसी वस्तु टकराई। शुरुआत में श्रमिकों ने इसे सामान्य पत्थर समझा, लेकिन सफाई करने पर स्पष्ट हुआ कि यह एक प्राचीन शिवलिंग है।

शिवलिंग की खोज की खबर फैलते ही आसपास के लोग वहां जुटने लगे। हर वर्ग और समुदाय के लोग जाति-धर्म की सीमाओं से ऊपर उठकर शिवलिंग के दर्शन और जलाभिषेक करने पहुंचे। पूरे मोहल्ले में इस खोज को लेकर धार्मिक माहौल बन गया है।
स्थानीय श्रद्धालुओं का मानना है कि इस शिवलिंग के प्रकट होने से इलाके में शांति, सुख और समृद्धि का आगमन होगा। शिवलिंग के सामने के हिस्से में शिव की आंखों जैसी आकृति वाले दो छिद्र दिखाई दे रहे हैं, जबकि पीछे का हिस्सा अभी भी एक बड़े पत्थर से जुड़ा हुआ है। आश्चर्य की बात यह है कि जब शिवलिंग पर पानी चढ़ाया जाता है, तो वह पानी नीचे की ओर बहने के बजाय स्थिर रहता है। लोगों का विश्वास है कि यह संकेत है कि शिवलिंग अत्यंत शक्तिशाली और चमत्कारी है।
जैसे ही शिवलिंग की सूचना फैली, इलाके के वरिष्ठ पंडितों और धार्मिक जानकारों को तुरंत बुलाया गया। पंडितों ने स्थल का निरीक्षण किया और इसे विशेष धार्मिक महत्व का स्थान बताया। उन्होंने कहा कि प्राचीन काल में यह स्थल संभवतः किसी मंदिर या धार्मिक स्थल का हिस्सा रहा होगा, जो समय के साथ मिट्टी में दब गया।

पूरे मोहल्ले में भक्ति का वातावरण बन गया है। महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग सुबह से ही शिवलिंग के दर्शन के लिए आ रहे हैं और फूल, दूध, जल तथा बेलपत्र अर्पित कर पूजा कर रहे हैं। इस दौरान “बोल बम” और “हर-हर महादेव” के जयकारों से वातावरण गूंज उठा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वे इस स्थान को स्थायी पूजा स्थल के रूप में विकसित करने की योजना बना रहे हैं। कुछ लोगों ने सुझाव दिया है कि शिवलिंग के आसपास उचित ढांचा और सुरक्षा व्यवस्था की जाए, ताकि श्रद्धालु बिना किसी बाधा के पूजा-अर्चना कर सकें।
यह खोज न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व भी रखती है। रविवार का यह दिन भट्टाचार्या पाड़ा के लोगों के लिए यादगार बन गया, जब उनके बीच आस्था का यह प्राचीन प्रतीक पुनः प्रकट हुआ।














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