
दुर्गापुर : विश्व भेड़िया दिवस के अवसर पर पश्चिम बर्धमान जिले के दुर्गापुर स्थित सृजनी प्रेक्षागृह में एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य भेड़ियों और लकड़बग्घों के संरक्षण, उनके घटते आवास और मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व पर जागरूकता बढ़ाना था। इस अवसर पर दक्षिण बंगाल के मुख्य वन संरक्षक बिद्युत सरकार, दुर्गापुर वन प्रभाग के वन अधिकारी अनुपम खान, बर्धमान वन प्रभाग की वन अधिकारी संचिता शर्मा, दुर्गापुर वन रेंजर सुदीप बनर्जी और कई अन्य विभागीय कर्मचारी मौजूद थे।
वन विभाग के साथ मिलकर कार्य कर रही वन्यजीव संरक्षण की स्वयंसेवी संस्था ‘विंग्स’ ने बताया कि भूरे भेड़िये और लकड़बग्घे जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र का अहम हिस्सा हैं। ये प्रजातियां जंगल में शिकार और शवभक्षण की प्राकृतिक प्रक्रिया बनाए रखती हैं, जिससे पारिस्थितिकी संतुलन कायम रहता है। लेकिन औद्योगीकरण, खनन के विस्तार और मानव बस्तियों के अतिक्रमण के कारण इनके प्राकृतिक आवास तेजी से सिकुड़ रहे हैं, जिससे इनके अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है।

विंग्स के संपादक अर्कज्योति मुखर्जी ने बताया कि संगठन भूरे भेड़ियों के संरक्षण के लिए विशेष निगरानी रख रहा है। जंगलों में ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं, जिनसे उनकी गतिविधियों पर लगातार नज़र रखी जाती है। उन्होंने कहा कि उनके सदस्य पूरे समर्पण से काम कर रहे हैं, ताकि इन प्रजातियों को विलुप्त होने से बचाया जा सके।
वन विभाग के सूत्रों के अनुसार, कंक्षा के मालनदिघी स्थित बिष्णुपुर के जंगलों और दुर्गापुर-फरीदपुर प्रखंड के मधाईगंज के जंगलों में भेड़ियों का प्रजनन बढ़ा है। यह वन्यजीव संरक्षण प्रयासों की सकारात्मक सफलता का संकेत है। विभाग ने इन इलाकों में ट्रैप कैमरों की संख्या बढ़ा दी है और स्थानीय निवासियों के बीच जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है, ताकि वे इन जानवरों को नुकसान न पहुंचाएं और सह-अस्तित्व का वातावरण बने।

दक्षिण बंगाल के मुख्य वन संरक्षक बिद्युत सरकार ने बताया कि भूरे भेड़िये और कुछ लकड़बग्घे विशेष रूप से गढ़ जंगल और मधाईगंज के जंगलों में देखे गए हैं। उन्होंने कहा, “हम विशेष निगरानी कर रहे हैं, ताकि इन दुर्लभ वन्य प्रजातियों को संरक्षित किया जा सके। अगर समय रहते इनके आवास सुरक्षित नहीं किए गए, तो यह प्रजातियां विलुप्त हो सकती हैं और वन का पारिस्थितिकी तंत्र असंतुलित हो जाएगा।”
कार्यशाला में यह संदेश स्पष्ट रूप से सामने आया कि इन वन्य जीवों के अस्तित्व के लिए मानव और प्रकृति के बीच संतुलित सह-अस्तित्व ही एकमात्र समाधान है। विशेषज्ञों ने कहा कि भेड़िये और लकड़बग्घे जंगल की सफाई और प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि ये लुप्त हो गए, तो अन्य कई प्रजातियों पर भी संकट गहराएगा।














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