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दुर्गापुर एसएससी परीक्षा केंद्र पर बाउंसर तैनाती से मचा हंगामा

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दुर्गापुर :  रविवार को एसएससी परीक्षा के दौरान दुर्गापुर के माइकल मधुसूदन मेमोरियल कॉलेज में ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने परीक्षार्थियों और अभिभावकों के बीच गहरी चिंता और सवाल खड़े कर दिए। परीक्षा केंद्र पर जहां पुलिसकर्मी पहले से ही सुरक्षा व्यवस्था के लिए मौजूद थे, वहीं कॉलेज प्रशासन ने अतिरिक्त रूप से पुरुष और महिला बाउंसर भी तैनात किए। इन बाउंसरों के गले में पहचान पत्र लटका हुआ था और वे काले कपड़ों में कॉलेज परिसर के अंदर खड़े दिखाई दिए।परीक्षा में शामिल होने पहुंचे करीब 1,300 से अधिक परीक्षार्थी जब केंद्र में दाखिल हुए, तो काले कपड़ों में मौजूद बाउंसरों को देखकर पहले तो वे भ्रमित हो गए। कई छात्रों ने सोचा कि यह विशेष पुलिस बल का हिस्सा हैं, लेकिन बाद में जब उन्हें बाउंसर होने की जानकारी मिली तो असंतोष खुलकर सामने आया।परीक्षार्थियों के एक वर्ग ने इस पर विरोध जताते हुए कहा कि जब पुलिसकर्मी पहले से मौजूद हैं तो बाउंसरों की क्या आवश्यकता है? उन्होंने सवाल किया कि क्या यह सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा है या फिर किसी विशेष कारण से कॉलेज प्रशासन ने उन्हें बुलाया है। इस मामले ने देखते ही देखते विवाद का रूप ले लिया और परीक्षा शुरू होने से पहले ही परिसर के बाहर हंगामा मच गया।मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय पूरी तरह कॉलेज प्रशासन का था। पुलिस ने कहा कि उन्होंने परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था में कोई ढिलाई नहीं की थी, लेकिन कॉलेज ने अतिरिक्त सुरक्षा के नाम पर बाउंसरों की नियुक्ति की।इस मामले पर दुर्गापुर के डीसी (पूर्व) अभिषेक गुप्ता ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि प्रश्न पत्र और परीक्षा केंद्र की सुरक्षा कॉलेज प्रशासन की जिम्मेदारी है। हालांकि, उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब पहले से ही पर्याप्त संख्या में पुलिसकर्मी तैनात थे तो बाउंसरों की नियुक्ति की आवश्यकता क्यों महसूस हुई। क्या कॉलेज प्रशासन ने पुलिस पर भरोसा नहीं किया? यह सवाल अब पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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इस घटना को लेकर राजनीति भी गर्मा गई है। भाजपा ने इस मुद्दे को तुरंत भुनाते हुए कॉलेज प्रशासन और एसएससी पर सवाल उठाए। दुर्गापुर पश्चिम से भाजपा विधायक लक्ष्मण घोरुई ने कहा, “एसएससी परीक्षा को लेकर पहले भी कई विवाद हो चुके हैं। अब परीक्षा केंद्र पर बाउंसरों की तैनाती यह दर्शाती है कि व्यवस्था में गंभीर खामियां हैं। हम यह स्पष्ट जवाब चाहते हैं कि आखिर बाउंसर क्यों लगाए गए।”दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस ने इस मामले से दूरी बनाए रखी। पांडवेश्वर से तृणमूल विधायक नरेंद्रनाथ चक्रवर्ती ने कहा कि उन्हें इस घटना की कोई जानकारी नहीं है। वे पहले मामले की सच्चाई जानेंगे, उसके बाद ही प्रतिक्रिया देंगे।कॉलेज प्रशासन ने इस विवाद पर चुप्पी साध ली। कॉलेज के प्रिंसिपल जीएम हेलालुद्दीन ने मीडिया से साफ कहा कि वे इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। उन्होंने यह भी जोड़ दिया कि यदि किसी को जानकारी लेनी है तो वह सीधे एसएससी से संपर्क करे।

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विशेषज्ञों का कहना है कि परीक्षा जैसे संवेदनशील मामले में सुरक्षा की जिम्मेदारी पुलिस और प्रशासन की होती है। ऐसे में बाउंसरों की तैनाती न केवल अनावश्यक है, बल्कि यह पारदर्शिता पर भी सवाल उठाती है। परीक्षार्थी और उनके परिजन यह जानने को लेकर चिंतित हैं कि क्या कॉलेज प्रशासन को परीक्षा की निष्पक्षता और सुरक्षा पर भरोसा नहीं था, जो उन्होंने निजी बाउंसरों का सहारा लिया।घटना के बाद यह मुद्दा सोशल मीडिया पर भी छा गया। परीक्षार्थियों और नागरिकों ने तस्वीरें व वीडियो शेयर करते हुए कॉलेज प्रशासन की आलोचना की। लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या अब परीक्षाओं में भी निजी बाउंसरों की जरूरत पड़ेगी? या फिर यह कदम किसी और उद्देश्य से उठाया गया है।रविवार को हुई इस घटना ने एसएससी की पहले से विवादित छवि को और धूमिल कर दिया है। परीक्षा की पारदर्शिता पर लगातार उठ रहे सवालों के बीच यह मामला आयोग और राज्य प्रशासन दोनों के लिए सिरदर्द बन गया है।

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