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मेमारी में कुएं की जहरीली गैस से दो मजदूरों की मौत

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पूर्व बर्दवान :  सोमवार सुबह मेमारी थाना क्षेत्र अंतर्गत उत्तर कैलाशपुर गांव में एक दिल दहला देने वाला हादसा हुआ, जिसने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया। यहां सेप्टिक टैंक के लिए कुआँ खोदने का कार्य चल रहा था कि अचानक जहरीली गैस की चपेट में आने से दो मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि तीन अन्य मजदूर गंभीर रूप से बीमार हो गए। इस हादसे ने न केवल गांव में शोक का माहौल बना दिया, बल्कि निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

सुबह-सुबह हुई घटना, मचा हड़कंप

जानकारी के अनुसार, देबाशीष सिंह रॉय के घर पर सेप्टिक टैंक बनाने के लिए पाँच मजदूरों की एक टीम सुबह-सुबह काम करने पहुँची। काम की शुरुआत में ही सबीर अली प्रधान (धात्रीग्राम) और सामू (हुगली के पांडुआ) कुएं में उतरे। कुछ ही देर में दोनों बेहोश होकर गिर पड़े। यह देख बाकी तीन मजदूर उन्हें बचाने के लिए कुएं में कूद पड़े, लेकिन जहरीली गैस ने उन्हें भी प्रभावित कर दिया। गनीमत रही कि उन्हें समय रहते रस्सियों और स्थानीय लोगों की मदद से बाहर निकाल लिया गया।

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मौत की पुष्टि, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

पुलिस और दमकल विभाग को तुरंत सूचना दी गई। बचाव दल ने मौके पर पहुंचकर काफी मशक्कत के बाद दोनों बेहोश मजदूरों को बाहर निकाला और बर्धमान मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेजा। लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। चिकित्सकों ने बताया कि जहरीली गैस सांस के जरिए शरीर में प्रवेश करने से उनकी मृत्यु हुई। मृतकों के परिवारों में कोहराम मच गया है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

प्रशासन ने की जांच शुरू

हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी। प्रारंभिक जांच में स्पष्ट हुआ है कि कुएं में पर्याप्त सुरक्षा इंतज़ाम नहीं किए गए थे। मजदूर बिना किसी सुरक्षा उपकरण और ऑक्सीजन सिलेंडर के ही कुएं में उतर गए, जिससे यह दुखद घटना घटित हुई। पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और जीवित बचे मजदूरों के बयान दर्ज किए हैं।

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सुरक्षा पर उठे सवाल

गांव के लोगों ने आरोप लगाया कि ठेकेदार और घर मालिक ने सुरक्षा मानकों को पूरी तरह नजरअंदाज किया। सेप्टिक टैंक निर्माण में अक्सर जहरीली गैस का खतरा होता है, लेकिन फिर भी न तो मास्क उपलब्ध कराए गए और न ही कोई वैज्ञानिक उपकरण। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएँ दोबारा न हों।

सदमे में बचे मजदूर

कुएं से जिंदा बाहर निकाले गए तीन मजदूर अभी भी गहरे सदमे में हैं। उनका कहना है कि उन्होंने अपने साथियों को अपनी आँखों के सामने मरते देखा। अगर उन्हें समय पर बाहर नहीं निकाला जाता तो शायद उनकी भी जान चली जाती। फिलहाल उनका इलाज किया जा रहा है।

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