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राजबाड़ी में गोपाल थीम से सजा रवींद्रनगर दुर्गा पूजा पंडाल

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आसनसोल : दुर्गा पूजा का पर्व केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं, बल्कि यह सांस्कृतिक विरासत और कलात्मक अभिव्यक्ति का भी अद्भुत संगम है। इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए आसनसोल के कोटमोड़ स्थित रवींद्रनगर उन्नयन समिति ने इस बार अपनी पूजा में एक अनोखा और आकर्षक थीम प्रस्तुत किया है। समिति ने इस वर्ष का विषय “राजबाड़ी में गोपाल” चुना, जिसने पूरे क्षेत्र में चर्चा का नया अध्याय खोल दिया है।

पूरे पंडाल को पारंपरिक राजसी महल की भांति सजाया गया है। भीतर प्रवेश करते ही ऐसा प्रतीत होता है मानो दर्शक किसी भव्य राजबाड़ी में पहुंच गए हों, जहां बाल रूप श्रीकृष्ण गोपाल अपनी लीलाओं से सबको मोहित कर रहे हों। शाम ढलते ही पंडाल रोशनी से जगमगाने लगता है और रंगीन झिलमिलाहट के बीच लोक-संस्कृति की झलक हर दर्शक को मंत्रमुग्ध कर देती है।

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पंडाल की सजावट में बारीक नक्काशीदार दीवारें, विशाल झूमर, पारंपरिक कलात्मक आभूषण और शिल्पकारी का अद्भुत मेल दिखाई देता है। हर कोना मानो बंगाल की ऐतिहासिक धरोहर और सांस्कृतिक समृद्धि का परिचायक बन गया है। यही कारण है कि केवल स्थानीय लोग ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों और दूर-दराज़ के गांवों से भी लोग यहां उमड़ रहे हैं।

हर शाम हजारों की भीड़ पंडाल में दर्शन के लिए पहुंच रही है। बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी मां दुर्गा की प्रतिमा के साथ-साथ इस अद्भुत थीम को देखकर भावविभोर हो रहे हैं। कई लोग तो पंडाल की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा कर रहे हैं, जिससे इसकी ख्याति और भी दूर-दूर तक फैल रही है।

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समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि इस बार का उद्देश्य केवल धार्मिक आयोजन करना ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत करना भी है। उनका मानना है कि नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ने और इतिहास की झलक दिखाने का सबसे प्रभावी तरीका यही है कि उत्सवों के माध्यम से उन्हें जिया जाए।

इस थीम ने रवींद्रनगर की दुर्गा पूजा को विशेष पहचान दी है। पूरे इलाके में चर्चा का केंद्र बने इस पंडाल ने न केवल धार्मिक आस्था को प्रबल किया है, बल्कि आसनसोल की दुर्गा पूजा की भव्यता में भी नया आयाम जोड़ दिया है। इस वर्ष का आयोजन स्पष्ट करता है कि परंपरा और आधुनिकता जब मिलती हैं, तो उत्सव केवल पूजा नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक बन जाता है।

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