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घाटाल में शव को केले के राफ्ट पर ले जाने से हड़कंप

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मिदनापुर : ‘श्मशान जैसी शांति’ की कहावत घाटाल में बेमानी हो गई है, जहां जलजमाव के बीच अंतिम यात्रा भी चुनौती बन गई है। मानसून के दौरान गालूडीह बांध से रुक-रुककर छोड़े जा रहे पानी के कारण घाटाल नगरपालिका के अधिकांश इलाके जलमग्न हैं। इसी बीच एक वीडियो ने प्रशासन की संवेदनशीलता और आपदा प्रबंधन की हकीकत को उजागर कर दिया है।सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो में केले के तनों को जोड़कर बने राफ्ट पर एक शव को ताड़ की लकड़ी से बनी छोटी नाव द्वारा खींचते हुए देखा गया। शव घाटाल नगरपालिका के वार्ड संख्या 9 की दिवंगत पूर्व पार्षद की पत्नी मनसा चौधरी का था,

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जिनका रविवार को निधन हुआ। भारी जलभराव के कारण सड़क मार्ग से शव को श्मशान घाट तक ले जाना संभव नहीं था। मजबूरन परिजनों को यह तरीका अपनाना पड़ा।यह दृश्य सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बन गया। आलोचकों ने प्रशासन की विफलता पर सवाल खड़े किए। भाजपा विधायक शीतल कपाट ने कहा, “अगर एक पूर्व पार्षद की पत्नी को ऐसे अंतिम विदाई दी गई, तो आम जनता की स्थिति की कल्पना की जा सकती है।” वहीं तृणमूल कांग्रेस के विधायक अजीत माइती ने इसे राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया और कहा कि जलभराव की स्थिति में इस तरह शव ले जाने की पुरानी परंपरा रही है।

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प्रशासनिक अधिकारी एसडीओ सुमन विश्वास ने सफाई दी कि नगर में नावों की व्यवस्था की गई है और नियंत्रण कक्ष भी चालू है, लेकिन उन्हें इस मामले की कोई जानकारी नहीं दी गई। नगर पालिका चेयरमैन तुहिनकांति बेरा ने भी यही तर्क दोहराया कि अगर सूचना नहीं मिलेगी तो मदद कैसे की जा सकती है।गौरतलब है कि 19 जून से 3 अगस्त के बीच घाटाल चार बार बाढ़ग्रस्त हुआ है। वर्तमान में 13 वार्ड जलमग्न हैं। लेकिन सरकारी तैयारियों के बावजूद ऐसी घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि कागज़ों पर योजनाएं ज़रूर हैं, पर ज़मीनी हकीकत अब भी लोगों को केले के राफ्ट पर अंतिम यात्रा के लिए विवश कर रही है।

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