सफाई कर्मियों की हड़ताल, भाजपा का निगम पर भ्रष्टाचार आरोप

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आसनसोल :  शुक्रवार को आसनसोल नगर निगम परिसर उस समय राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल का केंद्र बन गया, जब नगर निगम के सफाई कर्मचारियों ने वेतन वृद्धि सहित विभिन्न मांगों को लेकर काम ठप कर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। सुबह से ही बड़ी संख्या में सफाई कर्मी नगर निगम कार्यालय पहुंचे और अपनी समस्याओं को लेकर जमकर नारेबाजी की। कर्मचारियों की हड़ताल से नगर निगम प्रशासन पर दबाव बढ़ गया और शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका भी गहराने लगी।

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प्रदर्शन कर रहे सफाई कर्मियों का कहना है कि वे लंबे समय से कठिन परिस्थितियों में काम कर रहे हैं, लेकिन उनके अधिकारों की लगातार अनदेखी की जा रही है। कर्मचारियों की मुख्य मांगों में मासिक वेतन में बढ़ोतरी, सचित्र पहचान पत्र जारी करना और प्रोविडेंट फंड (पीएफ) की राशि को नियमित रूप से उनके खातों में जमा करना शामिल है। कर्मियों का आरोप है कि अप्रैल महीने से उनके वेतन से पीएफ की राशि काटी जा रही है, लेकिन वह पैसा अब तक उनके पीएफ खातों में जमा नहीं किया गया है। इससे कर्मचारियों में भारी असंतोष और असुरक्षा की भावना पैदा हो गई है।

सफाई कर्मियों ने कहा कि वे दिन-रात शहर को साफ-सुथरा रखने में जुटे रहते हैं, लेकिन बदले में उन्हें केवल आश्वासन ही मिलते हैं। कई कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि न तो उन्हें स्थायी पहचान पत्र दिया गया है और न ही भविष्य को सुरक्षित करने वाली योजनाओं का लाभ सही तरीके से मिल पा रहा है। मजबूर होकर उन्हें हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा।

इसी बीच, इस मुद्दे को लेकर भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता कृष्णेंदु मुखर्जी ने शुक्रवार को एक संवाददाता सम्मेलन कर आसनसोल नगर निगम पर तीखा हमला बोला। उन्होंने नगर निगम को “भ्रष्टाचार का गढ़” बताते हुए आरोप लगाया कि निगम में शायद ही कोई ऐसा विभाग बचा हो, जो भ्रष्टाचार से अछूता हो। उन्होंने कहा कि जो सफाई कर्मचारी शहर की सफाई के लिए अपनी मेहनत और पसीना बहाते हैं, उनके साथ इस तरह का व्यवहार बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और अमानवीय है।

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कृष्णेंदु मुखर्जी ने दावा किया कि केंद्र सरकार की ओर से आसनसोल नगर निगम को विकास और जनकल्याण के लिए करोड़ों रुपये भेजे जाते हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर बैठे नेता और अधिकारी उस धन का दुरुपयोग कर लेते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सफाई कर्मचारियों के पीएफ से काटी गई राशि का भी सही उपयोग नहीं हो रहा है और इसका सीधा नुकसान मेहनतकश कर्मचारियों को उठाना पड़ रहा है।

भाजपा नेता ने यह भी कहा कि आने वाले समय में सत्ता परिवर्तन होने पर नगर निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार की परतें खोली जाएंगी। उन्होंने दावा किया कि जब राज्य में भाजपा की सरकार बनेगी, तब निगम के भ्रष्ट नेताओं, अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और एक-एक पैसे का हिसाब लिया जाएगा। उन्होंने यह आश्वासन भी दिया कि भविष्य में सफाई कर्मियों को बेहतर वेतन, स्थायी नियुक्ति और सभी वैधानिक सुविधाएं दी जाएंगी।

फिलहाल, नगर निगम प्रशासन की ओर से इस पूरे मामले पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, सफाई कर्मचारियों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। इससे आने वाले दिनों में शहर की सफाई व्यवस्था और प्रशासनिक स्थिति पर गहरा असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

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