तृणमूल की नई सूची में बड़ा बदलाव, 74 विधायक बाहर, युवाओं पर दांव

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कोलकाता :  पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर बुधवार को राजनीतिक माहौल और अधिक गरमा गया, जब तृणमूल कांग्रेस ने अपनी संशोधित रणनीति के तहत उम्मीदवारों की सूची में व्यापक फेरबदल का संकेत स्पष्ट कर दिया। वर्ष 2021 के चुनावों की तुलना में इस बार पार्टी ने उम्मीदवार चयन में बड़े स्तर पर बदलाव करते हुए प्रदर्शन, उम्र और सामाजिक संतुलन को प्राथमिकता दी है।

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मुख्यमंत्री एवं तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने हाल ही में कोलकाता स्थित कालीघाट आवास पर पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बक्शी की उपस्थिति में उम्मीदवारों की सूची जारी की थी। इस सूची ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।

पार्टी ने इस बार कुल 294 विधानसभा सीटों में से 291 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि दार्जिलिंग, कर्सियांग और कालिम्पोंग सीटें सहयोगी दल भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा (BGPM) को दी गई हैं। यह कदम पहाड़ी क्षेत्रों में गठबंधन की रणनीति को मजबूत करने के रूप में देखा जा रहा है।

सबसे बड़ा बदलाव यह रहा कि तृणमूल कांग्रेस ने अपने 74 मौजूदा विधायकों को इस बार टिकट नहीं दिया। इसे पार्टी के भीतर जवाबदेही तय करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। साथ ही 15 विधायकों के निर्वाचन क्षेत्र भी बदल दिए गए हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि पार्टी नेतृत्व किसी भी स्तर पर निष्क्रियता को स्वीकार करने के पक्ष में नहीं है।

उम्मीदवारों के चयन में सामाजिक और आयु संतुलन पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। सूची के अनुसार, 177 उम्मीदवार ऐसे हैं जिनकी उम्र 60 वर्ष से कम है, जो युवाओं को प्राथमिकता देने की रणनीति को दर्शाता है। इसके अलावा 52 महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया गया है, जिससे महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया है।

सामाजिक प्रतिनिधित्व के तहत 47 मुस्लिम उम्मीदवारों और 85 अनुसूचित जनजाति वर्ग से प्रत्याशियों को मौका दिया गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम विभिन्न वर्गों के बीच संतुलन बनाए रखने और व्यापक जनाधार को साधने की कोशिश है।

हालांकि, इस बड़े फेरबदल के बीच पार्टी के भीतर असंतोष भी सामने आया है। जिन नेताओं को टिकट नहीं मिला, उनके समर्थकों ने कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन किया। हालांकि, ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया है कि जिन नेताओं को इस बार टिकट नहीं मिला है, उन्हें संगठन या प्रशासन में अन्य महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जाएंगी।

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इस सूची में कुछ बड़े और चर्चित नामों को बाहर रखा गया है। विशेष रूप से शिक्षक नियुक्ति घोटाले में आरोपित रहे पार्थ चटर्जी सहित कई नेताओं को टिकट नहीं दिया गया, जिससे यह संकेत मिला है कि पार्टी अपनी छवि सुधारने की दिशा में कदम उठा रही है।

कोलकाता महानगर की तीन सीटों पर नए चेहरों को मौका दिया गया है, जो पार्टी की नई सोच और नेतृत्व परिवर्तन की रणनीति को दर्शाता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि तृणमूल कांग्रेस इस बार चुनाव में नए समीकरणों के साथ उतर रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 15 वर्षों की सत्ता के बाद पार्टी एंटी-इनकंबेंसी के प्रभाव को कम करने के लिए यह रणनीति अपना रही है। नए चेहरों को मौका देना और पुराने चेहरों को हटाना इसी दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।

फिलहाल, पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह बदलाव चर्चा का विषय बना हुआ है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि तृणमूल कांग्रेस की यह नई रणनीति चुनावी मैदान में कितना असर डालती है और क्या पार्टी एक बार फिर सत्ता में वापसी करने में सफल होती है।

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