दुर्गापुर में भाजपा प्रत्याशी के प्रचार के दौरान विरोध, ‘जॉय बांग्ला’ नारों से बढ़ा तनाव

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दुर्गापुर : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के मद्देनज़र दुर्गापुर में राजनीतिक माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। शुक्रवार को शहर के वार्ड संख्या 11 स्थित कुरुरिया इलाके में उस समय तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई, जब भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी लक्ष्मण घारुई अपने समर्थकों के साथ चुनाव प्रचार के लिए पहुंचे। जनसंपर्क अभियान के दौरान स्थानीय लोगों के विरोध और ‘जॉय बांग्ला’ के नारों से माहौल अचानक गर्म हो गया।

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प्राप्त जानकारी के अनुसार, शुक्रवार सुबह से ही लक्ष्मण घारुई अपने कार्यकर्ताओं के साथ क्षेत्र में घर-घर जाकर लोगों से संपर्क कर रहे थे। इसी दौरान कुछ स्थानीय निवासियों ने उनसे सीधे सवाल करते हुए पिछले पांच वर्षों के कार्यों का लेखा-जोखा मांगा। लोगों का आरोप था कि वे लंबे समय तक क्षेत्र में सक्रिय नहीं रहे और अब चुनाव के समय मतदाताओं से समर्थन मांगने पहुंचे हैं।

स्थिति उस समय और अधिक संवेदनशील हो गई, जब इलाके की महिलाओं और युवाओं के एक समूह ने ‘जॉय बांग्ला’ के नारे लगाने शुरू कर दिए। देखते ही देखते यह नारेबाजी तेज हो गई और आसपास के लोग भी वहां जुटने लगे। इससे क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया और जनसंपर्क अभियान बाधित हो गया।

स्थानीय लोगों के आक्रोश को देखते हुए भाजपा प्रत्याशी लक्ष्मण घारुई को कुछ समय के लिए वहां से हटना पड़ा। हालांकि, उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर तृणमूल कांग्रेस पर आरोप लगाया। उनका कहना था कि यह विरोध स्वाभाविक नहीं, बल्कि सुनियोजित है। उन्होंने दावा किया कि विपक्षी दल पैसे और प्रभाव का इस्तेमाल कर इस तरह की स्थिति पैदा कर रहे हैं, ताकि उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके।

लक्ष्मण घारुई ने यह भी कहा कि इसके बावजूद उन्हें क्षेत्र के कई लोगों का समर्थन मिल रहा है। उन्होंने बताया कि जनसंपर्क के दौरान कई लोग उनसे आत्मीयता से मिले, कुछ ने उनका स्वागत किया और अपने समर्थन का भरोसा दिलाया। उनके अनुसार, जनता भाजपा की नीतियों और कार्यशैली पर विश्वास कर रही है।

वहीं दूसरी ओर, स्थानीय तृणमूल समर्थकों ने भाजपा प्रत्याशी के दावों को खारिज करते हुए कहा कि यह विरोध पूरी तरह जनता की नाराजगी का परिणाम है। क्षेत्र के एक युवा नेता मिथुन बाउरी ने कहा कि लक्ष्मण घारुई पिछले पांच वर्षों में क्षेत्र में नजर नहीं आए और अब चुनाव के समय अचानक सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने कहा कि इसी कारण लोगों में असंतोष है, जो नारों के रूप में सामने आया।

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मिथुन बाउरी ने यह भी कहा कि ‘जॉय बांग्ला’ केवल एक नारा नहीं, बल्कि राज्य की सांस्कृतिक और भावनात्मक पहचान का प्रतीक है। उनके अनुसार, लोग इस नारे के माध्यम से अपनी भावनाएं व्यक्त कर रहे हैं और यह पूरी तरह स्वाभाविक प्रतिक्रिया है।

इस घटना के बाद इलाके में कुछ समय के लिए तनाव का माहौल बना रहा, हालांकि स्थिति बाद में सामान्य हो गई। पुलिस प्रशासन ने भी स्थिति पर नजर बनाए रखी और किसी अप्रिय घटना को टालने के लिए सतर्कता बरती।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी माहौल में इस प्रकार की घटनाएं आम हो जाती हैं, जहां जनसंपर्क के दौरान नेताओं को जनता के सीधे सवालों और प्रतिक्रियाओं का सामना करना पड़ता है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि मतदाता अब अधिक जागरूक हो चुके हैं और वे अपने प्रतिनिधियों से जवाबदेही की अपेक्षा रखते हैं।

फिलहाल, दुर्गापुर में सभी राजनीतिक दल पूरी ताकत के साथ प्रचार में जुटे हुए हैं। ऐसे में कुरुरिया की यह घटना चुनावी माहौल को और अधिक संवेदनशील बनाने वाली साबित हो सकती है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि मतदाता किसके पक्ष में अपना समर्थन जताते हैं और चुनावी परिणाम किस दिशा में जाते हैं।

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