कोलकाता : पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं, लेकिन इस बार वजह राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि उनकी घोषित संपत्ति का ब्यौरा है। भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र से नामांकन दाखिल करते समय प्रस्तुत हलफनामे में उनकी संपत्ति में पिछले पांच वर्षों के दौरान हल्की कमी दर्ज की गई है। यह तथ्य न केवल राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है, बल्कि आम लोगों के बीच भी उनकी सादगीपूर्ण जीवनशैली को लेकर नई बहस छेड़ रहा है।

हलफनामे के अनुसार, मुख्यमंत्री की कुल चल संपत्ति वर्तमान में 15,37,509 रुपये आंकी गई है, जबकि वर्ष 2021 के चुनाव के दौरान यह राशि 16,72,352 रुपये थी। इस प्रकार बीते पांच वर्षों में उनकी संपत्ति में लगभग 1,34,843 रुपये की कमी आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सार्वजनिक जीवन में लंबे समय से सक्रिय रहने के बावजूद संपत्ति में गिरावट का यह आंकड़ा एक अलग संदेश देता है।
दस्तावेजों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि उनके नाम पर कोई अचल संपत्ति—जैसे मकान या जमीन—दर्ज नहीं है। उनका निवास कोलकाता के कालीघाट स्थित 30-बी, हरीश चटर्जी स्ट्रीट बताया गया है, लेकिन यह संपत्ति उनके नाम पर नहीं है। इसके अलावा उनके पास कोई निजी वाहन भी नहीं है और न ही किसी प्रकार का ऋण या देनदारी दर्ज है। यह स्थिति उनकी सादगीपूर्ण जीवनशैली को रेखांकित करती है, जिसे वह लंबे समय से सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करती रही हैं।
नकदी और बैंक जमा की बात करें तो हलफनामे के अनुसार उनके पास 75,700 रुपये नकद हैं, जबकि दो बैंक खातों में कुल 12,76,209 रुपये जमा हैं। वर्ष 2021 में उनके पास 69,255 रुपये नकद और लगभग 13,53,356 रुपये बैंक में जमा थे। उस समय उनके पास नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट (NSC) में भी निवेश था, जो वर्तमान में नहीं दिखाया गया है। इससे यह संकेत मिलता है कि उनकी निवेश संरचना में भी बदलाव आया है।
सोने की संपत्ति के मामले में वृद्धि दर्ज की गई है। उनके पास कुल 9 ग्राम 750 मिलीग्राम सोना है, जिसकी कीमत 2021 में लगभग 43,837 रुपये थी। वर्तमान बाजार दर के अनुसार इसकी कीमत बढ़कर करीब 1,45,000 रुपये तक पहुंच गई है। यह बढ़ोतरी सोने के दामों में आई तेजी को दर्शाती है, न कि संपत्ति में वास्तविक विस्तार को।

हलफनामे में यह भी उल्लेख किया गया है कि उनके खिलाफ किसी भी प्रकार का आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। किसी भी थाने में उनके विरुद्ध एफआईआर लंबित नहीं है, जो उनके राजनीतिक जीवन की एक महत्वपूर्ण विशेषता मानी जाती है।
राजनीतिक परिदृश्य की बात करें तो भवानीपुर सीट एक बार फिर हाई-प्रोफाइल मुकाबले का केंद्र बनती नजर आ रही है। वर्ष 2021 में नंदीग्राम में शुभेंदु अधिकारी से हार के बाद ममता बनर्जी ने भवानीपुर उपचुनाव जीतकर सत्ता में वापसी की थी। इस बार भी उनके सामने वही चुनौती खड़ी हो सकती है, क्योंकि विपक्ष की ओर से फिर से कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो ममता बनर्जी ने 1970 में माध्यमिक शिक्षा पूरी की, इसके बाद स्नातक, परास्नातक और कानून की पढ़ाई भी पूरी की। उनकी यह शैक्षणिक यात्रा उनके राजनीतिक जीवन के साथ-साथ निरंतर आगे बढ़ती रही। संपत्ति में मामूली गिरावट और सादगीपूर्ण जीवनशैली के बीच ममता बनर्जी एक बार फिर चर्चा में हैं। जहां एक ओर चुनावी सरगर्मियां तेज हैं, वहीं दूसरी ओर उनका यह वित्तीय ब्यौरा जनता के बीच एक अलग संदेश देता नजर आ रहा है। अब सबकी नजरें भवानीपुर सीट पर टिकी हैं, जहां यह देखना दिलचस्प होगा कि यह सादगी और राजनीतिक अनुभव चुनावी परिणामों को किस हद तक प्रभावित कर पाते हैं।















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