आसनसोल : पश्चिम बंगाल में कथित राशन घोटाले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शनिवार को अपनी जांच को और तेज करते हुए राज्य के विभिन्न हिस्सों में व्यापक तलाशी अभियान चलाया। केंद्रीय एजेंसी ने कोलकाता, हावड़ा, बनगांव, मुर्शिदाबाद और पश्चिम बर्धमान जिले के रानीगंज समेत कुल 12 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की, जिससे राजनीतिक और व्यावसायिक हलकों में हलचल मच गई है।
इसी कड़ी में ईडी की टीम ने रानीगंज क्षेत्र के एमएसबी रोड स्थित शिशुबागान चौराहे के पास रहने वाले एक प्रमुख चावल कारोबारी अजय कोयल के आवास पर भी दबिश दी। शनिवार तड़के शुरू हुई इस कार्रवाई में चार से पांच जांच अधिकारी केंद्रीय सुरक्षा बलों के साथ मौके पर पहुंचे। बताया जा रहा है कि चार वाहनों के काफिले के साथ पहुंचे अधिकारियों ने घर और उससे जुड़े परिसरों में लगभग 12 घंटे तक गहन तलाशी अभियान चलाया।
सूत्रों के अनुसार, अजय कोयल का व्यापार केवल राज्य या देश तक सीमित नहीं है, बल्कि उनका चावल निर्यात कारोबार अंतरराष्ट्रीय स्तर तक फैला हुआ है। इसके अलावा उनके पास खाद्य आपूर्ति से जुड़ी कई कंपनियां भी हैं, जिनका संचालन वे अपने परिजनों के साथ मिलकर करते हैं। लंबे समय से रानीगंज में सक्रिय इस कारोबारी परिवार का नाम जांच के दायरे में आने के बाद इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है।
हालांकि, ईडी अधिकारियों ने इस छापेमारी को लेकर आधिकारिक तौर पर कोई विस्तृत बयान नहीं दिया है, लेकिन विश्वसनीय सूत्रों का कहना है कि यह कार्रवाई राशन वितरण प्रणाली में कथित अनियमितताओं और काले बाजार से जुड़े मामलों की जांच के तहत की गई है। बताया जाता है कि हाल ही में गिरफ्तार एक आरोपी से पूछताछ के दौरान कई व्यापारियों के नाम सामने आए थे, जिसके आधार पर यह समन्वित छापेमारी अभियान चलाया गया।
राशन घोटाले की जड़ें वर्ष 2020 तक जाती हैं, जब नदिया जिले में पुलिस ने बड़ी मात्रा में सरकारी राशन सामग्री को काले बाजार में बेचे जाने का मामला उजागर किया था। उस समय करीब 762 किलोग्राम गेहूं और आटा बरामद किया गया था, जिस पर सरकारी वितरण की मुहर लगी हुई थी। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए आवंटित अनाज का एक बड़ा हिस्सा अवैध रूप से बाहर निकालकर ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा था।
इस मामले के गंभीर स्वरूप को देखते हुए जांच का जिम्मा बाद में प्रवर्तन निदेशालय को सौंपा गया। जांच के दौरान कई बड़े नाम सामने आए, जिनमें राज्य के पूर्व खाद्य मंत्री Jyotipriya Mallick भी शामिल रहे। ईडी ने उन्हें गिरफ्तार भी किया था, हालांकि बाद में उन्हें न्यायालय से जमानत मिल गई। वर्तमान में वे चुनावी मैदान में सक्रिय हैं।
ईडी की ताजा कार्रवाई के बाद राज्य की राजनीति में एक बार फिर इस मुद्दे को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज होने की संभावना है। विपक्षी दल जहां इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई बता रहे हैं, वहीं सत्तारूढ़ पक्ष इसे राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई करार दे सकता है।
फिलहाल, रानीगंज समेत विभिन्न स्थानों पर हुई इस छापेमारी ने यह संकेत दे दिया है कि ईडी राशन घोटाले की तह तक पहुंचने के लिए पूरी गंभीरता से जुटी हुई है। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है, जिस पर पूरे राज्य की नजरें टिकी हुई हैं।

















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