दुर्गापुर : विधानसभा चुनाव के प्रथम चरण के मतदान के बाद शुक्रवार दोपहर राज्यभर में बंद पड़ी शराब की दुकानें दोबारा खुलते ही दुर्गापुर में भारी भीड़ उमड़ पड़ी। शहर के सिटी सेंटर क्षेत्र सहित विभिन्न इलाकों में दुकानें खुलने से पहले ही बड़ी संख्या में लोग पहुंच गए थे। जैसे ही दोपहर 12 बजे बिक्री शुरू हुई, कई स्थानों पर लंबी कतारें लग गईं और लोगों में खरीदारी की जल्दबाजी साफ दिखाई दी।
चुनाव आयोग और आबकारी विभाग के निर्देशों के तहत मतदान से पहले राज्य में शराब की बिक्री पर रोक लगाई गई थी। प्रथम चरण के मतदान को देखते हुए 20 अप्रैल से शराब की दुकानें बंद कर दी गई थीं। गुरुवार को मतदान प्रक्रिया संपन्न होने के बाद शुक्रवार को निर्धारित समय पर दुकानें फिर से खोली गईं। चार दिनों तक बंद रहने के कारण शुक्रवार को ग्राहकों की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में अधिक रही।
दुर्गापुर के सिटी सेंटर इलाके में सबसे अधिक भीड़ देखने को मिली। दुकान खुलने से काफी पहले लोग पहुंचने लगे थे। कई लोग लाइन में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते रहे। कुछ स्थानों पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की व्यवस्था करनी पड़ी। दुकानदारों ने भी ग्राहकों की संख्या को देखते हुए पहले से तैयारी कर रखी थी।
स्थानीय नागरिकों ने बताया कि लगातार कई दिनों तक दुकानें बंद रहने के कारण शुक्रवार को खरीदारी करने वालों की संख्या अचानक बढ़ गई। अनेक लोग सप्ताहांत को देखते हुए भी पहले दिन ही खरीदारी करना चाहते थे। इसी कारण दोपहर से शाम तक कई दुकानों के बाहर भीड़ बनी रही।
आबकारी विभाग के अधिकारियों ने बताया कि चुनावी नियमों के अनुसार मतदान क्षेत्रों में मतदान से 48 घंटे पहले शराब बिक्री बंद करना अनिवार्य होता है। इसका उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखना और मतदाताओं को किसी प्रकार के प्रभाव से बचाना है। हालांकि इस बार प्रथम चरण के मतदान से पहले विभाग ने अतिरिक्त सतर्कता बरतते हुए तीन दिन पहले ही दुकानें बंद करने का निर्णय लिया था।
विशेष बात यह रही कि यह आदेश केवल मतदान वाले क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राज्य के अन्य जिलों में भी शराब की दुकानें बंद रखी गईं। इस कारण जिन क्षेत्रों में मतदान नहीं था, वहां भी दुकानों पर ताले लगे रहे। राज्यभर में एक समान प्रतिबंध लागू होने से कई स्थानों पर लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ा, लेकिन प्रशासन ने इसे निष्पक्ष चुनाव के लिए आवश्यक कदम बताया।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार चुनाव के दौरान शराब के दुरुपयोग की आशंका को देखते हुए यह निर्णय लिया गया। चुनावी मौसम में मतदाताओं को प्रभावित करने या कानून-व्यवस्था बिगाड़ने के प्रयासों को रोकने के लिए ऐसे प्रतिबंध प्रभावी माने जाते हैं। इसी वजह से मतदान समाप्त होने तक बिक्री पर पूर्ण रोक रखी गई थी।
दुर्गापुर के व्यापारिक हलकों का कहना है कि चार दिनों तक दुकानें बंद रहने से कारोबार प्रभावित हुआ। हालांकि शुक्रवार को अचानक बढ़ी बिक्री से कुछ हद तक राहत मिली। कई दुकानदारों ने बताया कि दोपहर के बाद से ग्राहकों की संख्या लगातार बढ़ती रही और शाम तक अधिकांश दुकानों पर व्यस्तता बनी रही।
सिटी सेंटर क्षेत्र के कुछ दुकानदारों ने कहा कि बंदी के कारण स्टॉक प्रबंधन और कर्मचारियों की व्यवस्था पहले से करनी पड़ी थी। दुकान खुलते ही भीड़ बढ़ने की संभावना को देखते हुए अतिरिक्त कर्मचारियों को बुलाया गया था, ताकि ग्राहकों को अधिक देर इंतजार न करना पड़े। कई दुकानों पर डिजिटल भुगतान की सुविधा का भी उपयोग अधिक हुआ।
दूसरी ओर, कुछ नागरिकों ने भीड़भाड़ पर चिंता जताई। उनका कहना था कि कतारों में अनुशासन बनाए रखने और सामाजिक व्यवस्था का ध्यान रखने की आवश्यकता है। कुछ स्थानों पर लोग जल्दबाजी में नियमों का पालन करते नजर नहीं आए, हालांकि पुलिस और प्रशासनिक कर्मियों की मौजूदगी से स्थिति सामान्य बनी रही।
अब लोगों की नजर दूसरे चरण के मतदान से पहले होने वाले फैसले पर टिकी है। अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि अगले चरण के मतदान से पहले भी पूरे राज्य में इसी प्रकार सामूहिक रूप से दुकानें बंद रहेंगी या केवल संबंधित मतदान क्षेत्रों में प्रतिबंध लागू होगा। आबकारी विभाग की ओर से आगामी दिनों में नया निर्देश जारी किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
राजनीतिक और प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि चुनाव के दौरान शराब बिक्री पर नियंत्रण लोकतांत्रिक प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण कदम है। इससे मतदान केंद्रों के आसपास शांति व्यवस्था बनाए रखने में सहायता मिलती है और किसी प्रकार के प्रलोभन की संभावना कम होती है।
शुक्रवार को दुर्गापुर में जो दृश्य देखने को मिला, उसने यह भी दिखाया कि लंबे समय तक बंदी के बाद मांग किस तरह अचानक बढ़ जाती है। दोपहर से लेकर शाम तक कई दुकानों पर ग्राहकों की आवाजाही जारी रही। सिटी सेंटर, बेनाचिति और अन्य क्षेत्रों में सामान्य से अधिक भीड़ दर्ज की गई।
फिलहाल दुकानें खुलने के बाद कारोबार फिर पटरी पर लौट आया है, लेकिन दूसरे चरण के मतदान को लेकर व्यापारी और ग्राहक दोनों अगली घोषणा का इंतजार कर रहे हैं। चुनावी माहौल के बीच प्रशासन की प्राथमिकता कानून-व्यवस्था और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करना है, जबकि आम लोग यह जानना चाहते हैं कि अगली बंदी कब और कितने दिनों की होगी।

















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