Breaking News

मतदान सेवा में लगे कर्मियों ने उठाए सवाल, वोट से वंचित होने का आरोप

Facebook
Twitter
WhatsApp

आसनसोल :  पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के प्रथम चरण में भारी मतदान प्रतिशत दर्ज होने के बीच शनिवार को पश्चिम बर्दवान जिले से एक अलग तस्वीर सामने आई। मतदान प्रक्रिया में सहयोग के लिए नियुक्त कई मतदाता सहायक बूथ कर्मियों ने आरोप लगाया है कि चुनाव ड्यूटी निभाने के बावजूद उन्हें स्वयं मतदान करने का अवसर नहीं मिला। इस मुद्दे को लेकर प्रभावित कर्मियों में नाराजगी देखी जा रही है और उन्होंने प्रशासन से जवाब मांगा है।

IMG 20250511 WA0050

जानकारी के अनुसार जिले में सैकड़ों कर्मियों को अल्प सूचना पर मतदाता सहायक बूथों में तैनात किया गया था। आरोप है कि कई कर्मचारियों को मात्र एक दिन पहले सूचना देकर अलग-अलग क्षेत्रों में भेजा गया। इनमें राज्य और केंद्र सरकार के कर्मचारी, शिक्षक तथा अन्य विभागों से जुड़े कर्मी शामिल थे। इनका दायित्व मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की सहायता करना, जानकारी देना तथा व्यवस्थाओं में सहयोग करना था।

कर्मियों का कहना है कि उन्हें 21 अप्रैल की दोपहर सूची जारी होने के बाद अगले दिन सुबह निर्धारित केंद्रों पर पहुंचने का निर्देश मिला। कई लोगों को सीधे डीसीआरसी केंद्र या मतदान बूथ पर रिपोर्ट करने को कहा गया। वहां पहुंचने पर उन्हें पहचान पत्र दिए गए, लेकिन शिकायत है कि उस पहचान पत्र का उपयोग मतदान के लिए मान्य नहीं था।

प्रभावित कर्मचारियों ने कहा कि उन्हें चुनाव प्रक्रिया में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभानी पड़ी, लेकिन उनके अपने मताधिकार की व्यवस्था नहीं की गई। कई कर्मियों का आरोप है कि उन्होंने सेक्टर अधिकारियों और संबंधित बूथ अधिकारियों से मतदान कराने का अनुरोध किया, फिर भी उन्हें अवसर नहीं मिला। कुछ कर्मचारियों का कहना है कि वैकल्पिक मतदान व्यवस्था या आवश्यक प्रक्रिया के बारे में भी स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।

शिकायतकर्ताओं के अनुसार जिले में इस प्रकार तैनात कर्मियों की संख्या लगभग तीन सौ के आसपास थी। इनमें कई वरिष्ठ आयु वर्ग के कर्मचारी भी शामिल थे, जिन्हें दूरदराज क्षेत्रों में भेजा गया। कुछ लोगों ने दावा किया कि उन्हें लंबी अवधि तक बूथों पर लगातार कार्य करना पड़ा और शुक्रवार सुबह तक ही घर लौट पाए।

आसनसोल क्षेत्र के एक शिक्षक परिवार से जुड़े व्यक्ति ने बताया कि उनकी पत्नी सहित कई सरकारी कर्मचारियों को देर रात सूचना देकर दूसरे जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों में भेजा गया। उन्होंने कहा कि तेज गर्मी, कठिन परिस्थितियों और लंबी ड्यूटी के बावजूद कर्मियों को मतदान का न्यूनतम अवसर तक नहीं मिला। उन्होंने इसे निराशाजनक और अनुचित बताया।

कर्मचारियों ने पारिश्रमिक को लेकर भी असंतोष जताया है। कुछ लोगों का आरोप है कि भुगतान राशि में एकरूपता नहीं रही। किसी को अलग राशि मिली तो किसी को कम भुगतान किया गया। कई कर्मियों ने दावा किया कि अभी तक उन्हें कोई भुगतान नहीं मिला है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

मतदाता सहायक बूथ कर्मियों ने यह भी कहा कि कई केंद्रों पर उनके बैठने या विश्राम की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। गर्मी के मौसम में खुले स्थानों पर लंबे समय तक कार्य करना पड़ा, जिससे असुविधा बढ़ी। उनका कहना है कि भविष्य में यदि ऐसी नियुक्ति की जाए तो बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित की जानी चाहिए।

इस पूरे मामले ने प्रशासनिक समन्वय पर भी प्रश्न खड़े किए हैं। कुछ विभागों के स्तर पर यह कहा गया कि कर्मचारियों की तैनाती चुनावी प्रक्रिया के तहत हुई थी, इसलिए संबंधित निर्वाचन तंत्र ही इस विषय पर स्पष्ट जवाब दे सकता है। इससे प्रभावित कर्मियों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है कि उनकी शिकायत किस स्तर पर सुनी जाएगी।

IMG 20240918 WA0025

सूत्रों के अनुसार कुछ कर्मचारियों ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी और जिला निर्वाचन अधिकारी को ईमेल के माध्यम से शिकायत भेजी है। शिकायत में मतदान से वंचित होने, अल्प सूचना पर ड्यूटी देने, भुगतान संबंधी विसंगतियों तथा सुविधाओं की कमी का उल्लेख किया गया है। साथ ही मांग की गई है कि भविष्य में ऐसी स्थिति न बने और प्रभावित कर्मियों के मताधिकार की रक्षा सुनिश्चित की जाए।

राजनीतिक और प्रशासनिक विशेषज्ञों का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में लगे कर्मचारियों का स्वयं मतदान कर पाना लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यदि ड्यूटी के कारण कर्मचारी मतदान से वंचित रह जाएं तो यह गंभीर प्रशासनिक कमी मानी जा सकती है। ऐसे मामलों में पहले से स्पष्ट दिशा-निर्देश और वैकल्पिक मतदान व्यवस्था आवश्यक होती है।

हालांकि जिला निर्वाचन कार्यालय की ओर से शनिवार शाम तक इस विषय पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। अधिकारियों के जवाब के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि आरोप कितने सही हैं और किन परिस्थितियों में ये कर्मचारी मतदान नहीं कर पाए।

फिलहाल पश्चिम बर्दवान जिले में यह मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है। भारी मतदान प्रतिशत के बीच चुनावी प्रक्रिया में सहयोग करने वाले कर्मियों के मताधिकार पर उठे सवालों ने प्रशासन के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। प्रभावित कर्मचारी चाहते हैं कि उनकी शिकायतों की निष्पक्ष जांच हो और भविष्य में किसी भी कर्मचारी को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।

Leave a Comment

Leave a Comment

[democracy id="1"]

Share Market

Also Read This

Gold & Silver Price

Our Visitor

0 4 1 5 3 8
Users Today : 2
Users Yesterday : 37