दुर्गापुर : दुर्गापुर में विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस को एक और बड़ा झटका लगा, जब दुर्गापुर नगर निगम के पूर्व मेयर और वार्ड संख्या 32 के प्रभावशाली नेता मानस रॉय ने पार्टी छोड़ने की घोषणा कर दी। लंबे समय से संगठन के भीतर चल रहे असंतोष और उपेक्षा का आरोप लगाते हुए उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी जाहिर की। उनके इस फैसले ने न केवल तृणमूल कांग्रेस के भीतर हलचल तेज कर दी है, बल्कि औद्योगिक शहर दुर्गापुर की राजनीति में भी नई चर्चा छेड़ दी है।
राज्य में भाजपा की प्रचंड जीत के बाद तृणमूल कांग्रेस लगातार आत्ममंथन की स्थिति में दिखाई दे रही है। पार्टी की हार के कारणों को लेकर नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। इसी माहौल में मानस रॉय का इस्तीफा राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वर्षों तक तृणमूल कांग्रेस का प्रमुख चेहरा रहे मानस रॉय ने खुलकर कहा कि पार्टी के भीतर उन्हें लगातार अपमान और उपेक्षा का सामना करना पड़ा, जिसके कारण अंततः उन्हें यह कठोर निर्णय लेना पड़ा।
गुरुवार को मीडिया से बातचीत करते हुए मानस रॉय ने कहा कि उन्होंने कभी ममता बनर्जी की विचारधारा और जनआंदोलन से प्रेरित होकर तृणमूल कांग्रेस का दामन थामा था। पार्टी के लिए उन्होंने वर्षों तक संघर्ष किया और संगठन को मजबूत बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई। लेकिन समय के साथ संगठन की कार्यप्रणाली बदलती चली गई और समर्पित कार्यकर्ताओं को महत्व मिलना बंद हो गया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब उन्हें राजनीतिक और व्यक्तिगत संकटों का सामना करना पड़ा, तब पार्टी के भीतर कोई भी उनके समर्थन में आगे नहीं आया।
उन्होंने कहा कि पार्टी के कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं द्वारा लगातार उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। संगठन के भीतर गुटबाजी और व्यक्तिगत स्वार्थ हावी हो चुके हैं, जिससे पुराने कार्यकर्ताओं का मनोबल टूट रहा है। मानस रॉय ने यह भी कहा कि उन्होंने पार्टी के लिए संघर्ष करते हुए कई कठिन परिस्थितियों का सामना किया, लेकिन बदले में उन्हें सम्मान नहीं मिला।
गौरतलब है कि फरवरी 2025 में मानस रॉय और उनके पुत्र अवरानिल रॉय को आर्थिक अनियमितताओं और वित्तीय धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उन पर एक व्यवसायी को महंगे मोबाइल फोन का भुगतान न करने सहित कई गंभीर आरोप लगाए गए थे। इस मामले के बाद से ही वह राजनीतिक और कानूनी दबावों से घिरे हुए थे। हालांकि उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को राजनीतिक साजिश बताया था, लेकिन उस समय भी पार्टी नेतृत्व की ओर से उन्हें खुला समर्थन नहीं मिला था।
दुर्गापुर औद्योगिक क्षेत्र में मानस रॉय को लंबे समय तक एक प्रभावशाली और जमीनी नेता के रूप में देखा जाता रहा है। नगर निगम राजनीति में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती थी, विशेषकर वार्ड संख्या 32 में उनका प्रभाव काफी व्यापक था। ऐसे में उनके इस्तीफे को तृणमूल कांग्रेस के लिए एक बड़ा संगठनात्मक नुकसान माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि मानस रॉय भविष्य में किसी अन्य राजनीतिक दल के साथ जाते हैं, तो इसका असर दुर्गापुर के स्थानीय राजनीतिक समीकरणों पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकता है।
इधर, मानस रॉय के इस्तीफे के बाद तृणमूल कांग्रेस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि चुनावी हार के बाद संगठन के भीतर असंतोष लगातार बढ़ रहा है और आने वाले दिनों में कुछ और बड़े नेता भी खुलकर सामने आ सकते हैं।

















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