आसनसोल : पश्चिम बर्धमान जिले में विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर अब असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। जिले की सभी विधानसभा सीटों पर पराजय के बाद पार्टी के अंदर आरोप-प्रत्यारोप और नेतृत्व को लेकर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। इसी क्रम में बुधवार शाम तृणमूल कांग्रेस के पूर्व युवा अध्यक्ष कौशिक मंडल द्वारा सोशल मीडिया पर किया गया एक पोस्ट राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बन गया।
अपने पोस्ट में कौशिक मंडल ने जिला नेतृत्व पर तीखा हमला बोलते हुए पश्चिम बर्धमान में पार्टी की स्थिति के लिए सीधे तौर पर जिला अध्यक्ष नरेंद्रनाथ चक्रवर्ती को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कटाक्ष भरे अंदाज में लिखा कि जिले में पार्टी को “शून्य” तक पहुंचाने के लिए नेतृत्व को धन्यवाद दिया जाना चाहिए। इस टिप्पणी के बाद राजनीतिक माहौल अचानक गर्म हो गया और पार्टी के भीतर चल रही नाराजगी खुलकर सामने आ गई।
कौशिक मंडल ने आरोप लगाया कि संगठन में लंबे समय से अहंकार, दबाव की राजनीति और कथित तौर पर तोलाबाजी की संस्कृति बढ़ती गई, जिससे जमीनी कार्यकर्ताओं का मनोबल टूट गया। उन्होंने कहा कि वर्षों तक पार्टी के लिए संघर्ष करने वाले कई पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं को संगठन से किनारे कर दिया गया, जबकि व्यक्तिगत हितों को प्राथमिकता देने वाले लोगों को आगे बढ़ाया गया। उनके अनुसार, इसी कारण पार्टी की जड़ें कमजोर हुईं और जनता ने चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को नकार दिया।
पूर्व युवा नेता ने यह भी कहा कि संगठन के भीतर लिए गए कई फैसले कार्यकर्ताओं की राय के बिना किए गए, जिसका नुकसान अब पूरी पार्टी को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि हजारों कार्यकर्ता खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं और यही असंतोष चुनावी परिणामों में दिखाई दिया।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि कौशिक मंडल ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में पार्टी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भी टैग किया। इसके बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज हो गई कि मामला अब केवल जिला स्तर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राज्य नेतृत्व तक पहुंच चुका है। हालांकि, इस पूरे विवाद पर अभी तक जिला अध्यक्ष नरेंद्रनाथ चक्रवर्ती या तृणमूल कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
इधर विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे को लेकर तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि चुनाव परिणामों ने यह साबित कर दिया है कि पार्टी के भीतर लंबे समय से असंतोष मौजूद था, जो अब सार्वजनिक रूप से सामने आने लगा है। विपक्ष का दावा है कि जनता ने बदलाव के पक्ष में मतदान कर संगठनात्मक राजनीति और कथित दबाव की संस्कृति को नकार दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव के तुरंत बाद इस तरह की सार्वजनिक बयानबाजी तृणमूल कांग्रेस की आंतरिक एकजुटता पर असर डाल सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि पार्टी नेतृत्व समय रहते संगठन के भीतर बढ़ रहे असंतोष को संभालने में सफल नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में यह विवाद और गहरा सकता है।
गौरतलब है कि इस बार पश्चिम बर्धमान जिले में तृणमूल कांग्रेस को एक भी विधानसभा सीट पर जीत नहीं मिली। भाजपा ने जिले की सभी सीटों पर विजय हासिल कर राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल दिए। ऐसे में हार के बाद पार्टी के भीतर मंथन के साथ-साथ आरोपों और जवाबी प्रतिक्रियाओं का दौर भी तेज होता दिखाई दे रहा है।

















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