कोलकाता/आसनसोल : पश्चिम बंगाल की नई सरकार में विभागों के आवंटन को लेकर महत्वपूर्ण घोषणा की गई। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में गठित मंत्रिमंडल की पहली विस्तृत बैठक के बाद विभिन्न मंत्रियों को उनके विभाग सौंप दिए गए। इसके साथ ही राज्य सरकार ने कई जनकल्याणकारी योजनाओं को लेकर भी अहम निर्णय लिए, जिनकी राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में व्यापक चर्चा हो रही है।
राज्य सचिवालय में आयोजित बैठक में मंत्रियों के विभागों की जिम्मेदारियां तय की गईं। आसनसोल दक्षिण विधानसभा क्षेत्र की विधायक अग्निमित्रा पाल को महिला एवं शिशु कल्याण विभाग का दायित्व सौंपा गया है। इसके साथ ही उन्हें नगर विकास एवं आवास विभाग की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी दी गई है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, औद्योगिक और शहरी क्षेत्रों से जुड़ी चुनौतियों को देखते हुए यह विभाग उनके लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
सरकार द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, उत्तर बंग विकास से जुड़े विभाग की जिम्मेदारी निशीथ प्रमाणिक को दी गई है। वहीं खाद्य एवं आपूर्ति विभाग अशोक कीर्तानिया को सौंपा गया है। वरिष्ठ भाजपा नेता दिलीप घोष को ग्राम विकास तथा पशु संसाधन विकास विभाग का दायित्व मिला है।
राज्य सरकार की पहली मंत्रिमंडलीय बैठक में सामाजिक कल्याण योजनाओं पर भी विशेष जोर दिया गया। बैठक में निर्णय लिया गया कि आगामी एक जून से “अन्नपूर्णा भंडार” योजना के अंतर्गत आर्थिक सहायता राशि वितरित की जाएगी। सरकार के अनुसार, इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को प्रतिमाह तीन हजार रुपये की सहायता प्रदान की जाएगी।
सरकार का कहना है कि इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और परिवारों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है। मंत्रिमंडल की बैठक के बाद कई नेताओं ने इसे महिलाओं के हित में महत्वपूर्ण कदम बताया।
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि नई सरकार ने विभागों के वितरण में क्षेत्रीय संतुलन और संगठनात्मक अनुभव को प्राथमिकता दी है। भाजपा समर्थकों ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे राज्य में प्रशासनिक बदलाव और विकास की दिशा में नई शुरुआत बताया।
आसनसोल और आसपास के क्षेत्रों में अग्निमित्रा पाल को महत्वपूर्ण विभाग मिलने पर भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह देखा गया। समर्थकों का कहना है कि उनके नेतृत्व में महिला कल्याण और शहरी विकास योजनाओं को गति मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि नई सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती चुनावी वादों को धरातल पर उतारने और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने की होगी। जनता की निगाह अब इस बात पर टिकी है कि सरकार अपने शुरुआती फैसलों को कितनी प्रभावी ढंग से लागू कर पाती है। इस बैठक के बाद राज्य की राजनीति में नई सरकार की प्राथमिकताएं स्पष्ट होती दिखाई दीं। विभागों के बंटवारे और जनहित योजनाओं की घोषणा ने प्रशासनिक गतिविधियों को नई दिशा देने का संकेत दिया है।

















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