आसनसोल : देशभर में विकसित भारत की अवधारणा और आर्थिक परिवर्तन को लेकर चर्चा के बीच पश्चिम बंगाल की आर्थिक संभावनाओं पर भी नई बहस तेज होती दिखाई दी। उद्योग, निवेश, अधोसंरचना और वित्तीय जागरूकता को केंद्र में रखकर राज्य के भविष्य को लेकर विशेषज्ञों और आर्थिक जानकारों ने सकारात्मक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। इसी क्रम में वित्तीय योजनाकार एवं सामाजिक जागरूकता अभियानों से जुड़े विशेषज्ञ रीतेश कुमार जालान ने कहा कि यदि पश्चिम बंगाल बदलती आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप अपनी नीतियों और सोच को आधुनिक दिशा देता है, तो राज्य पुनः देश के प्रमुख औद्योगिक और व्यापारिक केंद्रों में अपनी पहचान मजबूत कर सकता है।
उन्होंने कहा कि भारत इस समय “विकसित भारत” के व्यापक लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहा है, जहां डिजिटलीकरण, स्टार्टअप संस्कृति, विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स और आधारभूत संरचना के क्षेत्र में तेज़ी से विकास हो रहा है। ऐसे में पश्चिम बंगाल के पास भी अपनी आर्थिक क्षमता को पुनर्जीवित करने का महत्वपूर्ण अवसर मौजूद है। उनका मानना है कि राज्य की भौगोलिक स्थिति, बंदरगाह सुविधाएं, मानव संसाधन और व्यापारिक परंपरा उसे विकास की नई दिशा देने में सक्षम बना सकती हैं।
रीतेश कुमार जालान ने कहा कि एक समय पश्चिम बंगाल उद्योग, शिक्षा और सांस्कृतिक समृद्धि का प्रमुख केंद्र माना जाता था, लेकिन बीते दशकों में निवेश और रोजगार के अवसरों में कमी के कारण बड़ी संख्या में युवाओं को अन्य राज्यों की ओर जाना पड़ा। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य की मूल क्षमता कभी समाप्त नहीं हुई, बल्कि आवश्यकता केवल सकारात्मक आर्थिक वातावरण और दीर्घकालीन दृष्टिकोण की है।
उन्होंने कहा कि किसी भी राज्य का विकास केवल सरकारी योजनाओं से संभव नहीं होता, बल्कि समाज की मानसिकता में परिवर्तन भी उतना ही आवश्यक है। बंगाल को अब पारंपरिक नौकरी आधारित सोच से आगे बढ़कर उद्यमिता, नवाचार और निवेश आधारित अर्थव्यवस्था की ओर कदम बढ़ाना होगा। यदि युवा वर्ग स्वरोजगार, स्टार्टअप और कौशल विकास की दिशा में आगे बढ़े, तो राज्य में बड़े पैमाने पर आर्थिक परिवर्तन संभव है।
वित्तीय जागरूकता के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास की वास्तविक नींव वित्तीय रूप से जागरूक नागरिक होते हैं। जब लोग बचत, निवेश, दीर्घकालीन वित्तीय योजना और पूंजी निर्माण को समझते हैं, तभी समाज आर्थिक रूप से मजबूत बनता है। इसी उद्देश्य से विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को वित्तीय साक्षरता से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग, लॉजिस्टिक्स, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में अपार संभावनाएं मौजूद हैं। यदि निवेशकों को अनुकूल वातावरण और पारदर्शी व्यवस्था मिले, तो राज्य में रोजगार के नए अवसर तेजी से विकसित हो सकते हैं। इससे न केवल आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी, बल्कि सामाजिक परिवर्तन भी संभव होगा।

















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