आसनसोल : पश्चिम बर्धमान जिले के सुप्रसिद्ध घाघर बुढ़ी मंदिर परिसर में श्रद्धा, भक्ति और सांस्कृतिक उत्साह के बीच 40वें श्री श्री फलहारिणी कालिका पूजा महोत्सव का शुभारंभ हुआ। चार दिवसीय इस धार्मिक आयोजन को लेकर पूरे आसनसोल क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण बना हुआ है। मंदिर परिसर को आकर्षक रोशनी, रंग-बिरंगी सजावट और पारंपरिक अलंकरण से सुसज्जित किया गया है। दूर-दराज़ से श्रद्धालु माँ घाघर बुढ़ी के दर्शन और आशीर्वाद के लिए पहुंचने लगे हैं।
धर्म चक्र सेवा समिति की ओर से आयोजित इस महोत्सव को लेकर गुरुवार को प्रेस वार्ता कर विस्तृत कार्यक्रम की जानकारी दी गई। समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि यह आयोजन केवल पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और सामुदायिक एकता का प्रतीक बन चुका है। पिछले चार दशकों से लगातार आयोजित हो रहा यह महोत्सव अब पश्चिम बर्धमान जिले के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में गिना जाने लगा है।
समिति के अनुसार, महोत्सव की शुरुआत 14 मई दोपहर 1 बजे अष्टजाम कीर्तन के साथ हुई, जो 15 मई दोपहर 1 बजे तक निरंतर चलेगा। मंदिर परिसर में भजन, संकीर्तन और मंत्रोच्चार की ध्वनि से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो उठा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि और शांति की कामना की।

15 मई को सुबह 6:30 बजे बुधा मैदान से भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। यह यात्रा मोहिशिला और दुर्गा मंदिर मार्ग से होते हुए घाघर बुढ़ी मंदिर पहुंचेगी। शोभायात्रा में पारंपरिक वाद्ययंत्र, ध्वज, झांकियां और धार्मिक गीत आकर्षण का केंद्र होंगे। आयोजकों का कहना है कि इस यात्रा में हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। प्रशासन ने भी सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर विशेष तैयारी की है।
16 मई को महोत्सव का मुख्य आयोजन होगा। सुबह 9 बजे से कुमारी पूजा का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बालिकाओं को देवी स्वरूप मानकर पूजा-अर्चना की जाएगी। इसके बाद शाम 7:30 बजे श्री श्री फलहारिणी कालिका पूजा प्रारंभ होगी। रात 8 बजे महायज्ञ, 8:30 बजे भव्य आरती और 9 बजे महाप्रसाद वितरण का कार्यक्रम रखा गया है। देर रात बाउल संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक आनंद से भर देंगी।
17 मई की सुबह 5 बजे महायज्ञ की पूर्णाहुति के साथ इस चार दिवसीय धार्मिक महोत्सव का समापन होगा। आयोजकों का कहना है कि समापन के समय विशेष पूजा और शांति पाठ भी किया जाएगा।
धर्म चक्र सेवा समिति के पदाधिकारियों ने इस अवसर पर राज्य सरकार से माँ घाघर बुढ़ी मंदिर परिसर को “माँ घाघर बुढ़ी कॉरिडोर” के रूप में विकसित करने की मांग भी दोहराई। उनका कहना है कि यह स्थल धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यटन की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि सरकार उचित पहल करे तो यह मंदिर पश्चिम बर्धमान जिले का प्रमुख आध्यात्मिक और पर्यटन केंद्र बन सकता है।
समिति के संस्थापक राधा गोबिंद सिंह, अध्यक्ष रूपेश कुमार साव और सचिव डॉ. दीपक मुखर्जी ने बताया कि आयोजन को सफल बनाने में स्थानीय प्रशासन, आसनसोल नगर निगम, आसनसोल-दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट, सत्य साई सेवा समिति तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों का महत्वपूर्ण सहयोग मिल रहा है।
प्रेस वार्ता में राधेश्याम सिंह, नयन रॉय, बिकाश सिंह, मदन ठाकुर, जितेंद्र केवट, अजय सिंह, मिथिलेश पांडेय, अमरदीप साव, राजीव गुप्ता और सुसांत हाजरा सहित समिति के कई सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने पश्चिम बर्धमान जिले के लोगों से इस महोत्सव में शामिल होकर माँ घाघर बुढ़ी का आशीर्वाद प्राप्त करने की अपील की।
आसनसोल में आयोजित यह धार्मिक महोत्सव एक बार फिर यह संदेश दे रहा है कि आस्था, संस्कृति और सामाजिक एकता भारतीय परंपरा की सबसे बड़ी शक्ति हैं।

















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