आसनसोल : आसनसोल बस स्टैंड में कथित अवैध वसूली और “कट मनी” को लेकर रविवार को राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में नई बहस छिड़ गई। भाजपा नेता नीलू हाजरा द्वारा एक व्यक्ति को बस चालकों से कथित रूप से पैसे वसूलते हुए पकड़ने का दावा किए जाने के बाद मामला अचानक चर्चा के केंद्र में आ गया। घटना से जुड़ा एक वीडियो भी सामने आया है, जिसे लेकर पूरे शिल्पांचल क्षेत्र में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।
बताया जा रहा है कि वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति असीम मित्र उर्फ बच्चू है, जिस पर वर्षों से बस स्टैंड में तथाकथित “डेवलपमेंट फीस” के नाम पर राशि वसूलने के आरोप लगते रहे हैं। वीडियो में वह कथित रूप से यह कहते हुए सुनाई दे रहा है कि पहले भी वसूली होती थी और वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में भी उसे ऐसा करने के निर्देश मिले हैं। वीडियो वायरल होने के बाद राजनीतिक वातावरण और अधिक गर्म हो गया है।
घटना के दौरान भाजपा नेता नीलू हाजरा ने कथित वसूली का विरोध करते हुए कहा कि आसनसोल उत्तर विधानसभा क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अवैध वसूली, सिंडिकेट या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भाजपा नेतृत्व ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि पार्टी के नाम पर कोई भी गैरकानूनी गतिविधि स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।
इस विवाद के बाद पुराने आरोप भी फिर चर्चा में आ गए हैं। आरोप है कि पिछले लगभग डेढ़ दशक से बस स्टैंड में विकास शुल्क के नाम पर बस चालकों से नियमित रूप से राशि वसूली जाती रही। कुछ श्रमिक संगठनों और परिवहन प्रतिनिधियों ने पूर्व में भी आरोप लगाया था कि इस वसूली से एकत्र धनराशि का पूरा हिसाब सार्वजनिक नहीं किया गया। इस मामले को लेकर पहले भी प्रशासन और नगर निगम के समक्ष शिकायतें दर्ज कराई जा चुकी हैं।
सूत्रों के अनुसार, पूर्व में सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत भी इस विषय में कई प्रश्न उठाए गए थे। इनमें यह जानने की मांग की गई थी कि निजी व्यक्तियों को वसूली की अनुमति किस आधार पर दी गई, कुल कितनी राशि वसूली गई और उसमें से कितनी सरकारी खाते में जमा हुई। इन सवालों ने उस समय भी प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर बहस छेड़ दी थी।
भाजपा विधायक कृष्णेंदु मुखर्जी ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि किसी राजनीतिक दल या सरकारी संस्था के नाम पर अवैध वसूली की जा रही है तो दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान व्यवस्था में भ्रष्टाचार और सिंडिकेट संस्कृति को संरक्षण नहीं दिया जाएगा तथा किसी भी शिकायत की गंभीरता से जांच कराई जाएगी।
जानकारी के अनुसार, आसनसोल बस स्टैंड से प्रतिदिन बड़ी संख्या में मिनी और लंबी दूरी की बसों का संचालन होता है। परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों का दावा है कि प्रत्येक वाहन से नियमित रूप से राशि वसूले जाने के कारण प्रतिदिन हजारों रुपये का लेन-देन होता रहा है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।
इधर बस चालकों और कर्मचारियों के बीच भी असमंजस और भय का माहौल बताया जा रहा है। कुछ लोगों का कहना है कि वर्षों से चली आ रही व्यवस्था के कारण कई चालक खुलकर विरोध करने से बचते रहे हैं। वहीं यात्रियों ने भी बस स्टैंड की मूलभूत सुविधाओं की खराब स्थिति पर चिंता व्यक्त की है। लोगों का कहना है कि यदि विकास शुल्क के नाम पर राशि ली गई है तो उसका उपयोग यात्रियों की सुविधाओं के विकास में दिखाई देना चाहिए।
फिलहाल मामला राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि जांच के बाद प्रशासन क्या कदम उठाता है और क्या लंबे समय से लग रहे आरोपों की निष्पक्ष पड़ताल हो सकेगी।

















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