आसनसोल : ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के उद्देश्य से रविवार को आसनसोल दक्षिण थाना परिसर में विशेष जागरूकता बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न धार्मिक संगठनों और संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। पुलिस प्रशासन की ओर से ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग, निर्धारित समय सीमा और कानूनी प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी गई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि कानून सभी धर्मों और संस्थाओं पर समान रूप से लागू होगा तथा नियमों का पालन सुनिश्चित करना सभी की जिम्मेदारी है।
बैठक में मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा और गिरजाघरों से जुड़े प्रतिनिधि उपस्थित रहे। पुलिस अधिकारियों ने ध्वनि प्रदूषण अधिनियम-2000 के तहत जारी दिशा-निर्देशों की जानकारी देते हुए बताया कि किसी भी धार्मिक, सामाजिक या सार्वजनिक आयोजन में ध्वनि विस्तारक यंत्रों का उपयोग निर्धारित मानकों और समय सीमा के भीतर ही किया जा सकता है। इसके उल्लंघन की स्थिति में कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।
पुलिस प्रशासन ने कहा कि हाल के समय में ध्वनि विस्तारक यंत्रों को लेकर कई क्षेत्रों में विवाद और तनाव की स्थिति उत्पन्न हुई थी। ऐसे में लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाना और कानून को लेकर स्पष्टता देना आवश्यक हो गया था। इसी उद्देश्य से सभी धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों को एक मंच पर बुलाकर नियमों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की जानकारी दी गई।
आसनसोल दक्षिण थाना के प्रभारी अधिकारी बिस्वजीत मुखर्जी ने कहा कि पुलिस की प्राथमिकता सामाजिक शांति और आपसी सद्भाव बनाए रखना है। उन्होंने बताया कि किसी भी प्रकार की भ्रांति या गलतफहमी से बचने के लिए यह बैठक आयोजित की गई, ताकि भविष्य में कोई अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो। उन्होंने कहा कि सभी संगठनों ने प्रशासन को सहयोग करने का आश्वासन दिया है।
बैठक को संबोधित करते हुए एसीपी अब्दुल गफ्फार ने कहा कि कानून के अनुसार सभी धार्मिक संस्थानों को ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग से संबंधित नियमों का पालन करना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि ध्वनि अधिनियम-2000 के प्रत्येक प्रावधान को विस्तार से समझाया गया है और सभी प्रतिनिधियों से अपेक्षा की गई है कि वे अपने-अपने संस्थानों में इन नियमों का पालन सुनिश्चित करेंगे।
अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासन किसी विशेष धर्म या समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि सार्वजनिक व्यवस्था और नागरिक सुविधा को ध्यान में रखकर कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि ध्वनि प्रदूषण केवल कानूनी विषय नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और सामाजिक संतुलन से जुड़ा मुद्दा भी है।
बैठक के दौरान विभिन्न धार्मिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखे और पुलिस प्रशासन के प्रयास की सराहना की। कई प्रतिनिधियों ने कहा कि यदि समय-समय पर इस प्रकार की संवादात्मक बैठकों का आयोजन किया जाए तो सामाजिक समन्वय और अधिक मजबूत होगा। यह बैठक कानून व्यवस्था, सामाजिक सौहार्द और नागरिक जागरूकता की दिशा में प्रशासन की महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखी जा रही है।

















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