आसनसोल : बर्नपुर स्थित एक विद्यालय में अतिरिक्त शुल्क वसूली और मध्याह्न भोजन योजना में कथित अनियमितताओं के आरोपों को लेकर मंगलवार को राजनीतिक हलचल तेज हो गई। भारतीय जनता पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने विद्यालय पहुंचकर प्रशासन के खिलाफ विरोध जताया और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। घटना के बाद अभिभावकों और स्थानीय लोगों के बीच भी चर्चा का माहौल बना हुआ है।
भाजपा नेताओं का आरोप है कि सरकारी नियमों के तहत विद्यार्थियों से निर्धारित शुल्क लिया जाना चाहिए, लेकिन विद्यालय में अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। पार्टी प्रतिनिधियों ने दावा किया कि कई अभिभावकों ने उनसे संपर्क कर शुल्क संबंधी शिकायतें दर्ज कराई थीं, जिसके बाद वे मामले की जानकारी लेने विद्यालय पहुंचे।
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व भाजपा नेता अनमोल सिंह कर रहे थे। उनके साथ भाजपा आसनसोल दक्षिण मंडल-2 के अध्यक्ष रामानंद साह तथा अल्पसंख्यक मोर्चा के कई कार्यकर्ता भी उपस्थित थे। नेताओं ने विद्यालय के प्रधानाध्यापक से मुलाकात कर शुल्क संरचना, मध्याह्न भोजन योजना और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठाए।

भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि विद्यालय में मध्याह्न भोजन योजना के संचालन में भी पारदर्शिता का अभाव है। उनका कहना था कि विद्यार्थियों को मिलने वाली सुविधाओं में अनियमितता की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की।
अनमोल सिंह ने आरोप लगाया कि विद्यालय प्रबंधन समिति पर लंबे समय से कुछ प्रभावशाली लोगों का दबदबा बना हुआ है, जिसके कारण सामान्य अभिभावकों की समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और विद्यार्थियों के हितों की रक्षा के लिए भाजपा आंदोलन जारी रखेगी।
वहीं भाजपा नेता रामानंद साह ने आरोप लगाया कि विद्यालय के प्रशासनिक कार्यों में बाहरी दबाव बनाया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी विद्यालय की गतिविधियों से दूर रखने का प्रयास किया गया, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
घटना के दौरान विद्यालय परिसर में कुछ समय के लिए तनावपूर्ण स्थिति बन गई, हालांकि बाद में बातचीत के जरिए माहौल शांत किया गया। विद्यालय प्रशासन की ओर से इस मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार संबंधित अधिकारियों को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दे दी गई है।
अभिभावकों का कहना है कि यदि शुल्क और योजनाओं में किसी प्रकार की गड़बड़ी हुई है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि विद्यार्थियों के भविष्य और अधिकारों से किसी प्रकार का समझौता न हो। कई अभिभावकों ने प्रशासन से पारदर्शी व्यवस्था लागू करने की मांग भी उठाई है।
स्थानीय राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह मामला और अधिक तूल पकड़ सकता है। फिलहाल सभी की निगाहें प्रशासनिक जांच और आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

















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