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कालीपहाड़ी से हटे ‘विश्व बांग्ला’ प्रतीक चिन्ह, नई सरकार ने बदली विकास योजनाओं की पहचान

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आसनसोल :  कालीपहाड़ी क्षेत्र में बुधवार को प्रशासनिक गतिविधियों के बीच एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला, जब राज्य सरकार के निर्देश पर ‘विश्व बांग्ला’ के प्रतीक चिन्हों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई। पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन के बाद से विभिन्न सरकारी परियोजनाओं और सार्वजनिक स्थलों पर पूर्ववर्ती शासनकाल में लगाए गए प्रतीकों और ब्रांडिंग को चरणबद्ध तरीके से हटाया जा रहा है। इसी क्रम में आसनसोल के कालीपहाड़ी इलाके में भी कार्रवाई की गई, जिसे लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।

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स्थानीय लोगों के अनुसार सुबह से ही संबंधित विभाग के कर्मचारी और मशीनरी इलाके में पहुंच गई थी। इसके बाद सड़क किनारे स्थापित ‘विश्व बांग्ला’ के बड़े प्रतीक चिन्ह को हटाने का कार्य शुरू किया गया। कार्रवाई के दौरान इलाके में लोगों की भीड़ जुट गई और कई लोग पूरे घटनाक्रम को देखने के लिए मौके पर मौजूद रहे।

ज्ञात हो कि इससे पहले कोलकाता के साल्ट लेक स्टेडियम के सामने से भी ‘विश्व बांग्ला’ का लोगो हटाया गया था। राज्य सरकार अब विभिन्न जिलों और नगर क्षेत्रों में लगे ऐसे प्रतीकों की समीक्षा कर रही है। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि सार्वजनिक स्थलों की नई रूपरेखा और विकास योजनाओं को वर्तमान सरकार की प्राथमिकताओं के अनुसार पुनर्गठित किया जा रहा है।

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इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए Bharatiya Janata Yuva Morcha के सदस्य Rahul Singh ने कहा कि राज्यभर में इसी तरह की कार्रवाई चल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में ‘विश्व बांग्ला’ परियोजना के नाम पर अनावश्यक खर्च किए गए और कई स्थानों पर बड़े स्तर पर वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई थीं।

राहुल सिंह ने कहा कि सरकार जनता के धन का उपयोग केवल दिखावे के लिए नहीं कर सकती। उनके अनुसार, जिन परियोजनाओं का सीधा लाभ आम लोगों तक नहीं पहुंच रहा था, उन्हें हटाकर नई योजनाओं को अधिक प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान सरकार पुरानी परियोजनाओं की समीक्षा कर उन्हें पारदर्शी और जनहितकारी स्वरूप देने का प्रयास कर रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार अब विकास कार्यों को केवल प्रतीकात्मक रूप देने के बजाय बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर ध्यान केंद्रित कर रही है। सड़क, स्वास्थ्य, पेयजल और रोजगार जैसी आवश्यक सेवाओं को प्राथमिकता दी जा रही है।

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हालांकि, इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। विपक्षी दलों के कुछ नेताओं का मानना है कि ‘विश्व बांग्ला’ केवल एक प्रतीक नहीं था, बल्कि राज्य की सांस्कृतिक और प्रशासनिक पहचान का हिस्सा बन चुका था। उनका कहना है कि किसी भी सरकार को पूर्ववर्ती योजनाओं को पूरी तरह समाप्त करने के बजाय उन्हें बेहतर बनाने की दिशा में काम करना चाहिए।

दूसरी ओर, स्थानीय नागरिकों के बीच इस विषय पर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। कुछ लोगों ने सरकार के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि सार्वजनिक धन का उपयोग केवल उपयोगी योजनाओं पर होना चाहिए। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि राज्य की पहचान से जुड़े प्रतीकों को हटाना उचित नहीं है।

प्रशासनिक अधिकारियों ने फिलहाल इस विषय पर औपचारिक टिप्पणी करने से परहेज किया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार आने वाले दिनों में आसनसोल और आसपास के अन्य इलाकों में भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रह सकती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद प्रशासनिक संरचना और सरकारी पहचान में बदलाव का यह दौर आने वाले समय में और तेज हो सकता है। फिलहाल कालीपहाड़ी में ‘विश्व बांग्ला’ प्रतीक चिन्ह हटाए जाने की घटना पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।

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