बर्नपुर : ईस्को प्रबंधन द्वारा कथित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के लिए जारी नोटिस के विरोध में शनिवार को बड़ी संख्या में फुटपाथी दुकानदारों और हॉकरों ने ईस्को टाउन कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन किया। प्रदर्शन का नेतृत्व वामपंथी नेत्री शिल्पी चक्रवर्ती ने किया। इस दौरान विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे छोटे व्यवसायियों और दुकानदारों ने पुनर्वास की मांग उठाते हुए प्रशासन से मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की अपील की।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्हें हाल ही में निर्धारित समय के भीतर अपने व्यवसायिक स्थल खाली करने का नोटिस दिया गया है। नोटिस में चेतावनी दी गई है कि समय सीमा समाप्त होने के बाद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा सकती है। इस सूचना के बाद छोटे दुकानदारों और उनके परिवारों में भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए शिल्पी चक्रवर्ती ने कहा कि संबंधित दुकानदार वर्षों से क्षेत्र में छोटे-छोटे व्यवसाय संचालित कर अपने परिवारों का भरण-पोषण कर रहे हैं। इन व्यवसायों पर अनेक परिवारों की आजीविका निर्भर है। यदि बिना वैकल्पिक व्यवस्था के इन्हें हटाया जाता है, तो सैकड़ों लोग आर्थिक संकट का सामना करने को विवश हो सकते हैं।

उन्होंने कहा कि विकास और आधारभूत संरचना के विस्तार का विरोध किसी को नहीं है, लेकिन विकास के साथ मानवीय संवेदनाओं का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। प्रशासन और संबंधित प्रबंधन को चाहिए कि किसी भी कार्रवाई से पहले प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और रोजगार के विकल्पों पर विचार करे।
चक्रवर्ती ने यह भी कहा कि क्षेत्र में औद्योगिक विकास और आधुनिकीकरण की प्रक्रिया निरंतर जारी है, किंतु स्थानीय युवाओं और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को पर्याप्त रोजगार अवसर नहीं मिल पा रहे हैं। उनका तर्क था कि यदि स्थानीय स्तर पर रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जाएं, तो लोगों को सड़क किनारे दुकानें लगाने की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी।
प्रदर्शन में शामिल दुकानदारों ने बताया कि वे वर्षों से छोटे स्तर पर व्यापार कर अपने परिवारों की आवश्यकताओं को पूरा कर रहे हैं। अधिकांश लोगों के पास आय का कोई दूसरा साधन नहीं है। ऐसे में अचानक व्यवसाय बंद होने की स्थिति उनके लिए गंभीर सामाजिक और आर्थिक संकट पैदा कर सकती है।
प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से मांग की कि प्रभावित दुकानदारों का सर्वेक्षण कर उन्हें व्यवस्थित बाजार परिसर अथवा वैकल्पिक व्यापारिक स्थान उपलब्ध कराया जाए। उनका कहना था कि पुनर्वास के बिना हटाने की कार्रवाई न्यायसंगत नहीं मानी जा सकती।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगों से अवगत कराया। ज्ञापन में स्पष्ट किया गया कि वे कानून और प्रशासनिक निर्णयों का सम्मान करते हैं, किंतु आजीविका के अधिकार की भी रक्षा होनी चाहिए।
प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। हालांकि, दुकानदारों ने संकेत दिया कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो वे आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाते रहेंगे।
अब क्षेत्र के प्रभावित परिवारों की नजर प्रशासन और प्रबंधन के अगले कदम पर टिकी हुई है। लोगों को उम्मीद है कि विकास कार्यों और मानवीय सरोकारों के बीच संतुलन स्थापित करते हुए ऐसा समाधान निकाला जाएगा, जिससे किसी भी परिवार की आजीविका प्रभावित न हो।

















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