आसनसोल : विश्व पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने और धार्मिक आस्था को प्रकृति संवर्धन से जोड़ने के उद्देश्य से आनंदम रेसीडेंसी परिसर में शनिवार को एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। यहां आयोजित आध्यात्मिक अनुष्ठान के दौरान भक्ति और पर्यावरण संरक्षण का अद्भुत समन्वय देखने को मिला, जहां श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से वृक्षारोपण कर हरित भविष्य के निर्माण का संकल्प लिया।
आनंदम रेसीडेंसी में इन दिनों आयोजित धार्मिक कार्यक्रम के अंतर्गत हनुमान चालीसा पाठ और वैदिक अनुष्ठान चल रहा है। इसी क्रम में विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में 51 विद्वान पंडितों की उपस्थिति में 101 पौधों का रोपण किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक वातावरण के बीच संपन्न हुए इस कार्यक्रम ने उपस्थित लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक होने का संदेश दिया।
कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ता विवेकानंद ठाकुर, विपुल मिश्रा तथा उनके सहयोगियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। सभी ने पौधारोपण कर प्रकृति संरक्षण की शपथ ली और लोगों से अधिकाधिक वृक्ष लगाने तथा उनकी नियमित देखभाल करने का आह्वान किया।
आयोजकों ने कहा कि भारतीय संस्कृति में वृक्षों को सदैव पूजनीय माना गया है। पीपल, बरगद, नीम और तुलसी जैसे पौधों का धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों दृष्टियों से विशेष महत्व है। ऐसे में धार्मिक आयोजनों को पर्यावरण संरक्षण के अभियान से जोड़कर समाज में सकारात्मक संदेश पहुंचाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि केवल पौधे लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें सुरक्षित रखना और विकसित करना भी उतना ही आवश्यक है। इसी उद्देश्य से लगाए गए सभी पौधों की नियमित देखरेख की व्यवस्था भी की गई है।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित श्रद्धालुओं ने पर्यावरण संतुलन बनाए रखने, प्रदूषण कम करने तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित वातावरण उपलब्ध कराने का सामूहिक संकल्प लिया। धार्मिक आस्था और प्रकृति संरक्षण के इस अनूठे संगम की स्थानीय लोगों ने भी सराहना की और इसे समाज के लिए प्रेरणादायी पहल बताया।

















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