बाराबनी : राज्य में नई सरकार के गठन के बाद अवैध कारोबार पर रोक लगाने और सिंडिकेट व्यवस्था खत्म करने के दावों के बीच बाराबनी विधानसभा क्षेत्र से सामने आई एक तस्वीर ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुक्रवार को क्षेत्र में अवैध कोयला कारोबार को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रतिबंधित गतिविधियां अब भी खुलेआम जारी हैं।
मामला बाराबनी विधानसभा क्षेत्र के नूनी ग्राम पंचायत इलाके से जुड़ा बताया जा रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, यहां बड़ी मात्रा में कोयला साइकिलों और छोटे वाहनों पर लादकर रखा गया था। सामने आई तस्वीरों में कथित रूप से कोयले का जमावड़ा दिखाई दे रहा है, जिसके बाद क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि जिस स्थान पर यह गतिविधि होने का आरोप लगाया जा रहा है, वह इलाका बाराबनी के विधायक अरिजीत राय के आवास और कार्यालय के आसपास स्थित है। लोगों ने सवाल उठाया कि यदि क्षेत्र में इस प्रकार की गतिविधियां लंबे समय से चल रही हैं तो स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की नजर इस पर क्यों नहीं पड़ी।
स्थानीय निवासियों के अनुसार, जिस मार्ग से यह कथित कोयला कारोबार संचालित हो रहा है, उसी रास्ते से जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी नियमित रूप से गुजरते हैं। ऐसे में लोगों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि गतिविधियां वास्तव में किसके संरक्षण में चल रही थीं।
सरकार की ओर से लगातार अवैध खनन और तस्करी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही जाती रही है। ऐसे में क्षेत्र से सामने आई यह तस्वीर ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर रही है। लोगों का कहना है कि यदि छोटे स्तर पर भी अवैध कारोबार जारी है तो बड़े नेटवर्क की स्थिति का अनुमान लगाया जा सकता है।
जानकारों के अनुसार, अवैध कोयला कारोबार केवल कुछ व्यक्तियों की गतिविधि नहीं होता, बल्कि इसके पीछे कई स्तरों पर संपर्क और व्यवस्था काम करती है। परिवहन, भंडारण और बिक्री जैसी प्रक्रियाओं के लिए स्थानीय स्तर पर नेटवर्क की आवश्यकता होती है। इसलिए ऐसे मामलों में केवल छोटे कारोबारियों पर कार्रवाई के बजाय पूरे तंत्र की जांच जरूरी होती है।
तस्वीर सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने सरकार पर निशाना साधा है। विपक्ष का कहना है कि अवैध कारोबार खत्म करने के दावे केवल घोषणाओं तक सीमित हैं। उनका आरोप है कि जब किसी जनप्रतिनिधि के क्षेत्र में ही ऐसी गतिविधियों की चर्चा सामने आती है तो प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
इस मामले को लेकर विधायक अरिजीत राय से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी। वहीं, पूर्व विधायक और मेयर विधान उपाध्याय ने भी इस मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल बयान देने से समस्या समाप्त नहीं होगी, बल्कि जमीन पर प्रभावी कार्रवाई दिखनी चाहिए।
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए। यदि किसी प्रकार की अनियमितता या अवैध गतिविधि प्रमाणित होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस मामले में प्रशासन क्या कदम उठाता है। क्या जांच के बाद अवैध कारोबार से जुड़े लोगों पर कार्रवाई होगी या मामला कुछ समय बाद अन्य मामलों की तरह ठंडा पड़ जाएगा। बाराबनी की यह घटना केवल एक इलाके की समस्या नहीं, बल्कि अवैध कारोबार रोकने की व्यवस्था की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़ा करती है।

















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