आसनसोल : डमरा क्षेत्र में गरीबों के लिए बनाई गई बीएसयूपी (शहरी गरीबों के लिए मूलभूत सेवाएं) आवास परियोजना के आवंटन को लेकर उठे विवाद ने शनिवार को नया मोड़ ले लिया। सरकारी आवास योजना में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद पुलिस प्रशासन ने जांच तेज कर दी है।
आरोप है कि पात्र जरूरतमंद परिवारों के लिए बनाए गए आवासों का आवंटन नियमों को दरकिनार कर किया गया। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जिन लोगों को सरकारी योजना का लाभ मिलना चाहिए था, उनके स्थान पर अन्य लोगों को कथित रूप से आर्थिक लेन-देन के आधार पर आवास उपलब्ध करा दिए गए।
मामला सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर नाराजगी बढ़ गई। लोगों ने सवाल उठाया कि गरीबों के लिए बनाई गई योजना में यदि गड़बड़ी हुई है तो इसके लिए जिम्मेदार कौन हैं और वास्तविक लाभार्थियों को उनका अधिकार कब मिलेगा।
शुक्रवार को विपक्षी नेताओं ने इस मुद्दे को लेकर आवाज उठाई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि आवास आवंटन प्रक्रिया में नगर निगम के कुछ कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध हो सकती है। विपक्ष की ओर से दावा किया गया कि कई पात्र लोगों के नाम सूची से हटाकर दूसरे लोगों को लाभ पहुंचाया गया।
आरोपों में नगर निगम कर्मचारी प्रमोद यादव का नाम भी सामने आया है। हालांकि पूरे मामले की वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। पुलिस ने सभी आरोपों और दस्तावेजों के आधार पर जांच शुरू कर दी है।
आसनसोल दक्षिण थाना पुलिस ने शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई शुरू की। पुलिस सूत्रों के अनुसार अब तक इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। गिरफ्तार आरोपियों को शनिवार को कानूनी प्रक्रिया के तहत अदालत में पेश किया गया।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आवास आवंटन में किस स्तर पर गड़बड़ी हुई और क्या इसमें कोई संगठित तरीके से काम करने वाला समूह शामिल था। पुलिस आवंटन सूची, सरकारी दस्तावेजों और संबंधित रिकॉर्ड की जांच कर रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बीएसयूपी जैसी योजनाएं समाज के कमजोर वर्गों के लिए बनाई जाती हैं। यदि ऐसी योजनाओं में अनियमितता होती है तो इसका सबसे ज्यादा नुकसान उन परिवारों को होता है, जिन्हें वास्तव में सहायता की जरूरत होती है।
निवासियों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही जिन गरीब परिवारों का अधिकार छीना गया है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर आवास उपलब्ध कराया जाए।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि यदि जांच के दौरान अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कदम उठाए जाएंगे।
डमरा बीएसयूपी आवास प्रकरण ने एक बार फिर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजर पुलिस जांच की अगली रिपोर्ट और उन खुलासों पर टिकी हुई है, जिनसे पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकेगी।

















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