बीस मिनट की वर्षा में डूबा प्रमुख बाजार क्षेत्र, जलनिकासी व्यवस्था पर उठे गंभीर प्रश्न

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आसनसोल : शहर के सबसे महत्वपूर्ण व्यावसायिक क्षेत्रों में शामिल आसनसोल बाजार एक बार फिर जलजमाव की समस्या को लेकर चर्चा में है। बीते दिनों हुई अल्प अवधि की वर्षा के बाद बाजार क्षेत्र के कई हिस्सों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई, जिससे व्यापारियों, ग्राहकों और श्रमिकों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। विशेष रूप से मुंशी बाजार स्थित बाकर अली लेन में सड़कें जलमग्न हो जाने से सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ और स्थानीय लोगों ने प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग की।

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आसनसोल बाजार को जिले की आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में थोक एवं खुदरा व्यापारी, ग्राहक और मालवाहक वाहन आते-जाते हैं। ऐसे में आधारभूत सुविधाओं की कमी और जलनिकासी व्यवस्था की कमजोर स्थिति लंबे समय से चिंता का विषय बनी हुई है। मंगलवार को हुई वर्षा ने एक बार फिर इस समस्या को उजागर कर दिया।

स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि थोड़ी सी बारिश होते ही सड़कें पानी से भर जाती हैं। जलभराव के कारण लोगों को आवाजाही में परेशानी होती है और व्यापारिक गतिविधियां भी प्रभावित होती हैं। कई स्थानों पर सड़क और नालियों का अंतर स्पष्ट नहीं रहने के कारण दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। व्यापारियों का कहना है कि बरसात के दौरान ग्राहकों की संख्या भी प्रभावित होती है, जिससे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

बाकर अली लेन, जिसे राम मंदिर मार्ग के नाम से भी जाना जाता है, बाजार क्षेत्र का अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस मार्ग से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में माल की ढुलाई होती है। जलजमाव के कारण मालवाहक वाहनों की आवाजाही बाधित होती है और श्रमिकों को भी कार्य करने में कठिनाई होती है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वर्षों से समस्या बनी रहने के बावजूद अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है।

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व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने बताया कि जलनिकासी व्यवस्था के सुधार के लिए कई बार संबंधित विभागों और प्रशासनिक अधिकारियों का ध्यान आकर्षित कराया गया है। इसके बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आगामी मानसून के दौरान समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।

स्थानीय नागरिकों का भी मानना है कि बाजार क्षेत्र की महत्ता को देखते हुए यहां विशेष विकास योजना लागू की जानी चाहिए। जलनिकासी तंत्र के आधुनिकीकरण, नालियों की नियमित सफाई और सड़कों के समुचित रखरखाव पर ध्यान देना आवश्यक है। उनका कहना है कि शहर के आर्थिक केंद्र की उपेक्षा पूरे क्षेत्र की व्यापारिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकती है।

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विशेषज्ञों का मत है कि तीव्र शहरीकरण और बढ़ते निर्माण कार्यों के कारण जलनिकासी तंत्र पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। ऐसे में वैज्ञानिक योजना और दीर्घकालिक आधारभूत ढांचा विकास की आवश्यकता है। यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में जलभराव की समस्या और विकराल हो सकती है।

फिलहाल व्यापारियों और स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए बाजार क्षेत्र में स्थायी जलनिकासी व्यवस्था विकसित करने की अपील की है। लोगों को उम्मीद है कि मानसून के चरम पर पहुंचने से पहले इस गंभीर समस्या के समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।

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