आसनसोल : जिले में रेत (बालू) की कथित कालाबाजारी, अवैध जमाखोरी और बढ़ती कीमतों के विरोध में शुक्रवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। पार्टी नेताओं और समर्थकों ने जिला प्रशासन के विरुद्ध नारेबाजी करते हुए रेत के अवैध कारोबार पर तत्काल प्रभावी कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शन का नेतृत्व कांग्रेस नेता प्रसेनजीत पुजारी, एस.एम. मुस्तफा तथा रवि यादव ने किया।

प्रदर्शन के बाद कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल जिला शासक कार्यालय पहुंचा और विभिन्न मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में रेत की बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण, वैध रेत घाटों की पारदर्शी व्यवस्था तथा अवैध कारोबार पर कठोर कार्रवाई की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई।
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि जिले में रेत की कथित कालाबाजारी के कारण सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंच रहा है, वहीं आम लोगों को निर्माण कार्यों के लिए ऊंचे दामों पर रेत खरीदनी पड़ रही है। उनका कहना है कि इससे मकान निर्माण, छोटे व्यवसाय और अन्य विकास कार्यों की लागत लगातार बढ़ रही है, जिसका सीधा असर मध्यमवर्गीय और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर पड़ रहा है।
प्रसेनजीत पुजारी, एस.एम. मुस्तफा और रवि यादव ने संयुक्त रूप से कहा कि प्रशासन को जिले के सभी वैध रेत घाटों की सूची, उपलब्ध स्टॉक तथा निर्धारित मूल्य सार्वजनिक करना चाहिए, ताकि आम नागरिकों को वास्तविक जानकारी मिल सके और बाजार में पारदर्शिता बनी रहे। उन्होंने यह भी मांग की कि अवैध जमाखोरी और बिना अनुमति के रेत कारोबार करने वालों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रशासन समय-समय पर कार्रवाई का दावा करता है, लेकिन जमीनी स्तर पर अवैध कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण दिखाई नहीं देता। उनका कहना है कि यदि शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाए गए तो पार्टी व्यापक जनआंदोलन शुरू करने को बाध्य होगी।
प्रदर्शन के दौरान कई स्थानीय नागरिकों ने भी रेत की बढ़ती कीमतों पर चिंता व्यक्त की। उनका कहना था कि निर्माण सामग्री महंगी होने से आवास निर्माण और अन्य विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। लोगों ने प्रशासन से बाजार में मूल्य नियंत्रण सुनिश्चित करने और नियमित निगरानी की मांग की।
पर्यावरण विशेषज्ञों का भी मानना है कि अवैध रेत खनन केवल आर्थिक नहीं, बल्कि पर्यावरणीय दृष्टि से भी गंभीर चुनौती है। अनियंत्रित खनन से नदियों का प्राकृतिक संतुलन प्रभावित होता है, जिससे जल संरक्षण, जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
कांग्रेस के इस विरोध प्रदर्शन के बाद रेत कारोबार का मुद्दा एक बार फिर जिले की राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चाओं के केंद्र में आ गया है। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई और रेत कारोबार को लेकर अपनाई जाने वाली नीति पर टिकी हुई हैं।















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