आसनसोल : आसनसोल नगर निगम के वार्ड संख्या 84 में नाली मरम्मत कार्य को लेकर रविवार को राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई। पूर्व भाजपा पार्षद मधुमिता चटर्जी ने पत्रकार वार्ता आयोजित कर नाली मरम्मत परियोजना में कथित अनियमितताओं, घटिया निर्माण गुणवत्ता तथा सार्वजनिक धन के दुरुपयोग के आरोप लगाए। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई किए जाने की मांग की।
पत्रकारों से बातचीत के दौरान मधुमिता चटर्जी ने दावा किया कि वार्ड 84 में नाली मरम्मत कार्य के लिए मेमो संख्या 1004/WS/Eng/2024 के तहत 16 मार्च 2024 को टेंडर स्वीकृत किया गया था। उनके अनुसार इस परियोजना का उद्देश्य क्षेत्र में लंबे समय से बनी जलजमाव की समस्या का स्थायी समाधान करना था, लेकिन वास्तविक कार्य योजना के अनुरूप नहीं हुआ।
उन्होंने आरोप लगाया कि नालियों की मूल समस्यानाली मरम्मत कार्य में अनियमितता के आरोप, पूर्व पार्षद ने निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग उठाईओं, जैसे गाद की सफाई, आवश्यक खुदाई, अवरोधों को हटाने तथा मजबूत कंक्रीट संरचना के निर्माण पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। इसके स्थान पर केवल सतही मरम्मत और प्लास्टर का कार्य कर परियोजना को पूर्ण दिखाने का प्रयास किया गया। उनका कहना था कि इसका परिणाम यह है कि हल्की वर्षा के बाद भी नालियां उफनने लगती हैं और आसपास के क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो जाती है, जिससे स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पूर्व पार्षद ने यह भी आरोप लगाया कि परियोजना के लिए स्वीकृत सरकारी राशि का समुचित उपयोग नहीं हुआ। उनके अनुसार स्वीकृत बजट और धरातल पर दिखाई देने वाले कार्य के बीच स्पष्ट अंतर दिखाई देता है, जिससे वित्तीय अनियमितता की आशंका उत्पन्न होती है। उन्होंने इस मामले में खर्च की गई राशि का स्वतंत्र ऑडिट कराने तथा तकनीकी विशेषज्ञों से निर्माण कार्य की भौतिक जांच कराने की मांग की।
पत्रकार वार्ता के दौरान मधुमिता चटर्जी ने वर्ष 2022 के नगर निगम चुनाव से जुड़े एक पुराने विवाद का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान उनके आवास पर हमला किया गया था। अपने दावे के समर्थन में उन्होंने कुछ कथित सीसीटीवी फुटेज मीडिया के समक्ष प्रस्तुत किए। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
पूर्व पार्षद ने नगर निगम प्रशासन से मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, परियोजना में हुए व्यय का विस्तृत ऑडिट कराया जाए तथा यदि किसी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाए।
इस मुद्दे को लेकर वार्ड 84 के कुछ स्थानीय निवासियों ने भी जलनिकासी व्यवस्था को लेकर चिंता व्यक्त की। उनका कहना है कि वर्षा के दौरान क्षेत्र में जलभराव की समस्या बार-बार सामने आती है और स्थायी समाधान की आवश्यकता है।
फिलहाल नगर निगम प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है। मामले में प्रशासन की प्रतिक्रिया और संभावित जांच को लेकर स्थानीय लोगों तथा राजनीतिक हलकों की निगाहें अब नगर निगम के आगामी कदमों पर टिकी हुई हैं।

















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