बर्नपुर : पश्चिम बर्धमान जिले के बर्नपुर में सेल-आईएसपी (इस्को स्टील प्लांट) द्वारा चलाए जा रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत लगभग छह दशक पुराने ऐतिहासिक बर्नपुर सिनेमा हॉल को ध्वस्त कर दिया गया। रविवार को बुलडोजर की कार्रवाई के बाद सोमवार को पूरे क्षेत्र में इस विषय को लेकर चर्चा का माहौल बना रहा। कभी बर्नपुर की सांस्कृतिक पहचान रहे इस सिनेमा हॉल के मलबे में तब्दील हो जाने से स्थानीय लोगों ने गहरी भावनात्मक पीड़ा व्यक्त की।
जानकारी के अनुसार, बर्नपुर सिनेमा हॉल कई वर्षों से बंद पड़ा था और उसका नियमित संचालन नहीं हो रहा था। इसके बावजूद यह भवन स्थानीय नागरिकों की स्मृतियों और शहर की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता था। अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान पूरे भवन को ध्वस्त कर दिया गया, जिसके बाद बड़ी संख्या में लोग स्थल पर पहुंचकर पुराने दिनों को याद करते दिखाई दिए।
स्थानीय बुजुर्गों ने बताया कि एक समय यह सिनेमा हॉल बर्नपुर और आसपास के क्षेत्रों का प्रमुख मनोरंजन केंद्र था। यहां नई फिल्मों के प्रदर्शन के दौरान लंबी कतारें लगती थीं और परिवारों के लिए यह अवकाश बिताने का पसंदीदा स्थान हुआ करता था। अनेक लोगों ने कहा कि इस भवन से उनकी युवावस्था की अनगिनत यादें जुड़ी थीं, जिन्हें अब केवल स्मृतियों में ही संजोकर रखा जा सकेगा।
बताया जाता है कि राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद सेल-आईएसपी प्रबंधन अपनी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए चरणबद्ध अभियान चला रहा है। इस अभियान के अंतर्गत विभिन्न स्थानों पर बने अवैध निर्माण, परित्यक्त भवन, क्लब तथा अन्य ढांचों को हटाया जा रहा है। इसी क्रम में बर्नपुर सिनेमा हॉल पर भी कार्रवाई की गई।
हालांकि स्थानीय नागरिकों के एक वर्ग ने इस निर्णय पर निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि इतने पुराने और ऐतिहासिक भवन को पूरी तरह ध्वस्त करने के बजाय उसका संरक्षण किया जा सकता था। उनका सुझाव है कि इस इमारत को विरासत भवन, सामुदायिक केंद्र, सांस्कृतिक सभागार अथवा पुस्तकालय के रूप में विकसित कर क्षेत्र के लोगों के उपयोग में लाया जा सकता था। उनका मानना है कि इससे शहर की ऐतिहासिक पहचान भी सुरक्षित रहती और नई पीढ़ी को स्थानीय विरासत से परिचित होने का अवसर मिलता।
सोमवार को पूरे बर्नपुर क्षेत्र में इस कार्रवाई को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। जहां कुछ लोगों ने इसे भूमि प्रबंधन की प्रक्रिया का हिस्सा बताया, वहीं अनेक नागरिकों ने इसे शहर की सांस्कृतिक धरोहर के एक महत्वपूर्ण अध्याय का अंत माना। समाचार लिखे जाने तक सेल-आईएसपी प्रबंधन की ओर से इस कार्रवाई को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था। स्थानीय लोगों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि ध्वस्त स्थल का भविष्य में किस उद्देश्य के लिए उपयोग किया जाएगा।

















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